प्रणाम पाठकों! ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। ज्ञान का वह महासागर, जहां बिना किसी परीक्षा के, केवल एक ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाकर आप सीधे डॉक्टरेट की उपाधि पा लेते हैं। हमारे इस विश्वविद्यालय के मानद प्रोफेसर यानी हमारे प्रिय फूफाजी और मौसाजी दिन-रात एक करके ऐसी-ऐसी दुर्लभ जानकारियां खोज लाते हैं, जिन्हें सुनकर अल्बर्ट आइंस्टीन भी अपनी कब्र में करवट बदल लें। आइए, आज कुछ ऐसे ही ‘परम सत्य’ दावों की पोल खोलते हैं।
1. यूनेस्को का शाश्वत प्रेम और हमारा राष्ट्रगान
हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के आते ही, यूनेस्को (UNESCO) के अधिकारी पेरिस का अपना सारा काम छोड़कर सीधे हमारे व्हाट्सएप ग्रुपों में आ धमकते हैं। वहां से एक गंभीर घोषणा होती है कि “भारतीय राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे बेहतरीन राष्ट्रगान घोषित किया गया है।” यह खबर पिछले एक दशक से हर साल ‘ताजा’ होकर वायरल होती है। यूनेस्को के बेचारे प्रवक्ता हर साल स्पष्टीकरण देकर थक चुके हैं कि भाई हमने ऐसा कुछ नहीं कहा, लेकिन हमारे देश के देशभक्त इस बात पर अड़े हैं। आखिर यूनेस्को की इतनी हिम्मत कि वह हमारे फूफाजी के फॉरवर्ड किए मैसेज को झुठला दे?
2. नासा की खिड़की से चमकती भारतीय दिवाली
दीवाली की रात खत्म नहीं होती कि अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के वैज्ञानिक अपना सारा काम छोड़कर कैमरे लेकर बैठ जाते हैं। वे अंतरिक्ष से भारत की एक ऐसी चमचमाती तस्वीर खींचते हैं, जिसमें पूरा भारत नीली, पीली और हरी रोशनियों में नहाया हुआ दिखता है। यह तस्वीर हर साल इतनी शिद्दत से वायरल होती है कि नासा वाले खुद डिप्रेशन में आ जाते हैं कि उन्होंने जो सैटेलाइट करोड़ों डॉलर खर्च करके बनाया था, वह बिना किसी फिल्टर के इतनी रंग-बिरंगी फोटो कैसे खींच लेता है! असलियत में वह एक साधारण थ्री-डी ग्राफिक इमेज होती है, लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘खगोलशास्त्रियों’ को कौन समझाए!
3. नींबू, लौंग और इलायची से हर बीमारी का इलाज
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सालों की रिसर्च और अरबों रुपये खर्च करके जो दवाइयां बनाई हैं, उन्हें हमारे व्हाट्सएप चाचू एक झटके में खारिज कर देते हैं। उनका दावा होता है, “सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पिएं, कैंसर जड़ से खत्म।” विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के डॉक्टर जहां अपनी डिग्री फाड़ने की सोच रहे होते हैं, वहीं हमारे मोहल्ले के शर्मा जी इस नुस्खे को आगे 50 लोगों को फॉरवर्ड करके मुफ्त में ‘पुण्य’ कमा रहे होते हैं।
तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आपके फोन की घंटी बजे और कोई संदेश आए जिसके अंत में लिखा हो “इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा”, तो कृपया अपने अंगूठे को थोड़ा आराम दें। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इस ज्ञान से बचें, क्योंकि ज्ञान बांटने से बढ़ता जरूर है, लेकिन अंधविश्वास बांटने से केवल मूर्खता बढ़ती है!