प्रिय देशवासियों और रोजाना डेढ जीबी डेटा पैक का उपभोग करने वाले प्रबुद्ध नागरिकों, बधाई हो! हमारे देश की सबसे बड़ी और सबसे सक्रिय यूनिवर्सिटी, यानी ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ ने अब अपना खुद का ‘फैक्ट-चेक’ विभाग खोल लिया है। अब तक आपको लगता था कि केवल कुछ चुनिंदा पत्रकार या संस्थाएं ही सच और झूठ का फैसला कर सकती हैं, लेकिन अब आपके पड़ोस वाले शर्मा जी और आपके अपने फूफा जी इस महान कार्य की कमान संभाल चुके हैं।
परम ज्ञानी फूफा जी का ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ फिल्टर
इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम का पहला नियम बहुत ही सरल और वैज्ञानिक है। अगर कोई संदेश ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ (Forwarded many times) के टैग के साथ आया है, तो वह परम सत्य है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर ढींगरा जी का मानना है कि जो झूठ दस बार भेजा जाए, वह आधा सच बन जाता है और जो सौ बार भेजा जाए, उसे सीधे यूनेस्को (UNESCO) द्वारा प्रमाणित मान लिया जाना चाहिए। इस फैक्ट-चेक विभाग का मुख्य कार्यालय सुबह की सैर वाले पार्कों और मोहल्ले की चाय की थड़ियों पर चलता है, जहां चाय की चुस्की के साथ ही सत्य की खोज कर ली जाती है।
वैज्ञानिक सिद्धांतों को अंगूठा दिखाता नया शोध
इस नए फैक्ट-चेक के तहत कुछ ऐसे क्रांतिकारी खुलासे हुए हैं, जिन्हें मुख्यधारा का बिकाऊ मीडिया आपसे हमेशा छिपाता आया है। उदाहरण के लिए, नासा ने अभी-अभी अपनी सैटेलाइट से फोटो खींचकर घोषणा की है कि दीवाली की रात भारत अंतरिक्ष से सोने की तरह चमकता है। हालांकि नासा के वैज्ञानिक खुद इस बात से हैरान हैं कि उन्होंने यह घोषणा कब की, लेकिन हमारे व्हाट्सएप फैक्ट-चेकर्स ने पीले रंग के बैकग्राउंड पर लाल अक्षरों में ‘ब्रेकिंग न्यूज’ लिखकर इसे अंतिम सत्य घोषित कर दिया है।
इसके अलावा, यदि आप बीमार हैं, तो डॉक्टर के पास जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस यूनिवर्सिटी के फैक्ट-चेक के अनुसार, उबलते पानी में नींबू का रस और चुटकी भर सेंधा नमक डालकर पीने से दुनिया की कोई भी बीमारी ठीक हो सकती है। अगर कोई आधुनिक डॉक्टर इसका विरोध करता है, तो उसे ‘विदेशी फार्मा कंपनियों का दलाल’ घोषित कर तुरंत ग्रुप से ब्लॉक कर दिया जाता है।
फैक्ट चेक करने की अनूठी तकनीक
इस विभाग की जांच प्रक्रिया बेहद आधुनिक है। यहां किसी तथ्य को परखने के लिए गूगल सर्च की नहीं, बल्कि केवल ‘भावनाओं’ की जरूरत होती है। यदि कोई खबर पढ़कर आपके भीतर राष्ट्रप्रेम या अचानक से गुस्सा उमड़ पड़े, तो समझ लीजिए वह खबर सौ प्रतिशत असली है। सबूत के तौर पर किसी भी पुरानी घटना का वीडियो, किसी दूसरी घटना से जोड़कर पेश कर दिया जाता है और अंत में ‘ग्रुप एडमिन’ का एक ‘थम्स-अप’ वाला इमोजी उस पर सरकारी मोहर का काम करता है।
अंत में, काक-वाणी की ओर से हम यही कहेंगे कि आप भी आंखें बंद करके इस नए फैक्ट-चेक विभाग के सक्रिय सदस्य बन सकते हैं। बस बिना सोचे-समझे ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाते रहिए और समाज में ज्ञान की इस अनूठी गंगा को बहाते रहिए। याद रखिए, आंखें बंद रखने से ही सबसे सुंदर सपने दिखाई देते हैं!