सुबह की पहली किरण के साथ जब आपके स्मार्टफोन की घंटी ‘टुंग-टुंग’ बजती है, तो समझ लीजिए कि ज्ञान का अमृत सीधे आपके इनबॉक्स में उतर चुका है। काक-वाणी के इस विशेष बुलेटिन में आज हम चर्चा करेंगे दुनिया के सबसे बड़े, सबसे सस्ते और सबसे खतरनाक विश्वविद्यालय की—यानी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी। यहाँ एडमिशन के लिए किसी परीक्षा की ज़रूरत नहीं होती, बस आपके पास एक चालू इंटरनेट कनेक्शन, एक अंगूठा और ‘Forwarded as received’ लिखने की बेशर्म कला होनी चाहिए।
यूनेस्को का स्पेशल अवार्ड और नासा की बेचैनी
इस अद्भुत यूनिवर्सिटी के दो सबसे प्रिय संगठन हैं—यूनेस्को (UNESCO) और नासा (NASA)। हर दूसरे हफ्ते यूनेस्को हमारे राष्ट्रगान को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित कर देता है। बेचारे यूनेस्को के अधिकारी पेरिस में बैठकर आज तक हैरान हैं कि उन्होंने यह अवार्ड कब, किसे और किस खुशी में दे दिया! उधर नासा के वैज्ञानिक दिन-रात टेलीस्कोप लेकर अंतरिक्ष में यही ढूंढ रहे हैं कि सूरज से ‘ॐ’ की आवाज़ आ रही है या नहीं। व्हाट्सएप के वैज्ञानिकों ने तो यह भी सिद्ध कर दिया था कि ₹2000 के नोट में एक ‘नैनो-जीपीएस चिप’ लगी है, जो ज़मीन के 120 फीट नीचे से भी सिग्नल भेज सकती है। हालांकि, जब नोट बंद हुए, तो वह चिप भी बिना किसी सॉफ़्टवेयर अपडेट के सीधे कचरे के डिब्बे में विलीन हो गई।
चिकित्सा जगत में तहलका: नींबू पानी बनाम कैंसर
जिस कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज के लिए दुनिया भर के डॉक्टर सालों से माथापच्ची कर रहे हैं, उसका रामबाण इलाज हमारे शर्मा जी ने सुबह-सुबह ग्रुप में भेज दिया। संदेश में दावा था कि “गर्म पानी में नींबू निचोड़कर पीने से कैंसर की कोशिकाएं तुरंत दम तोड़ देती हैं।” इस क्रांतिकारी शोध के बाद से बड़े-बड़े अस्पताल बंद होने की कगार पर हैं और नींबू बेचने वाले खुद को डॉक्टर समझने लगे हैं। इसके अलावा, तुलसी के पत्तों से कोरोना भगाने और फिटकरी के पानी से ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने के नुस्खे तो इतने वायरल हुए कि डॉक्टरों को खुद को क्वारंटाइन करना पड़ गया।
फैक्ट-चेक की कड़वी सच्चाई
अब आते हैं उस कड़वे सच पर जिसे समझदार लोग फैक्ट-चेक कहते हैं। जब इन दावों की गहराई से जांच की जाती है, तो पता चलता है कि यह सब केवल कोरी अफवाहें, फोटोशॉप की कलाकारी और खाली बैठे लोगों के दिमाग की उपज हैं। यूनेस्को ने ऐसा कोई सर्टिफिकेट नहीं बांटा और नासा अभी भी अंतरिक्ष की गुत्थियां सुलझाने में व्यस्त है, न कि भ्रामक ऑडियो क्लिप बनाने में। लेकिन हमारे व्हाट्सएप के ‘परमज्ञानियों’ को सच से क्या लेना-देना? उनका मानना है कि फैक्ट-चेक करने वाले लोग देश और संस्कृति के दुश्मन हैं। इसलिए, अगली बार जब आपके पास “इसे 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी” वाला संदेश आए, तो उसे भेजने वाले को ब्लॉक करें। क्योंकि असली अच्छी खबर वही होगी कि आपने समाज में एक झूठ फैलने से रोक दिया।