Title: संघर्ष का पथ
एक छोटे से गाँव में रहने वाला अक्षय, अपने माता-पिता के समर्थन में लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति के कारण अध्ययन नहीं कर पाया। वह अपने दोस्तों की तरह खेलने में और स्कूल से छुट्टी मिलते ही गांव के सहायता से नयी नयी चीजें सीखने में खुश रहता था।
युवाओं का समूह ने धर्म और राजनीति से निराश होकर, प्रोग्रामिंग सीखने का निर्णय लिया, जिसमें अक्षय भी शामिल हुआ। वह जल्द ही सीख गया और अपने क्षेत्र के निवेशकों के समर्थन से अपनी कंपनी शुरू की।
पहले कोई अक्षय को पुराने सोच के जड़ों में उलझाने की कोशिश नहीं की, लेकिन इससे बढ़कर, एक निविष्ट बिजली आग के साथ उसके स्टाफ कमरे में भी बातचीत करते हुए, इसे लदाख से कौशल निकालने वाला बागी रास्ता बनाया। इसे उसी दिन अक्षय ने स्टार्टअप मंच पर भी पेश किया था।
वह ने अपनी कंपनी के साथ प्रतिस्पर्धा करने की कल्पना नहीं की थी, लेकिन उसने अपनी पहली सीईओ के साथ एक एकजुटता साधी, जिसने कंपनी के स्टाफ में जेंडर, उम्र, जाति और धर्म के समान वितरण को सुनिश्चित किया।
बाजार में कंपनी के लिए प्रतिस्पर्धा आई और वह सफलता प्राप्त करने में अपनी कंपनी से आगे बढ़ गया। उसकी कंपनी लोगों को सस्ती दवाइयों व चिकित्सा उपकरणों में उन्नति लाने में मदद करती है।
अक्षय की कंपनी का विस्तार होता गया, लेकिन संघर्ष से पूरा होता नहीं था। कुछ समय बाद कंपनी को अधिकृत अनुमति मिली, लेकिन इसके लिए बहुत सारे फॉर्मलिटीज को पूरा करना पड़ा, जिसमें उसकी प्रोफ़ेशनल और वित्तीय उन्नति में बहुत थोड़ा वक्त बचने वाला था।
इसके बावजूद, अक्षय अब भी अपने गाँव से जुड़े हुए, उसकी सिंघानियां, जोगी, बेसान्सर और दोस्तों को लगता था कि वह उन्हें नजदीकी बिजली, साफ पानी और खाने का समान अधिकार के साथ जोड़ने का भाव धरता है।
अक्षय के सुबह का एक फोन उसे उसके साथ जुड़े गाँव के प्रधान लक्ष्मीपति के बातचीत से पार्थिव वक्रता बनाता है। लक्ष्मीपति अभी भी उससे मिलना चाहता था, जैसा कि वह हजारों समय कर चुका था। अक्षय के लिए प्रत्येक सेकंड हीरे के बराबर थे, लेकिन कंपनी के विस्तार और प्रशंसकों का प्रभाव सुनिश्चित करने में वह परेशान था।
दोनों ने मुश्किल समय में अपनी मदद न करने के लिए एक मंच पर मिलने का निर्णय लिया। तथापि, अक्षय ने न केवल गाँव के लोगों को सुविधाओं का अधिकार दिलाया था, बल्कि उसने एक और मुश्किल समय में लक्ष्मीपति को भी मदद की।
लक्ष्मीपति इस समय चकित और अनिश्चित था। अक्षय उसके काम पर जाकर उसे देखने में मदद कर सकता था, जो किसी अन्य बिल्डर के परिणाम में विफलता से मुक्त होने के लिए सहयोग मांगता था।
अक्षय लक्ष्मीपति को बताता है कि आप एक समय पढ़े व्यक्ति हैं, अब आप अपने काम पर खुद ध्यान दें, मैं अपने साथ आऊंगा और आपको मदद करूंगा।
अंत में, वे मिलने जाते हैं और उसकी मदद से लक्ष्मीपति सफल एक बिल्डर के लिए उसके नाम की एक नई परियोजना जमा कर देता है।
लक्ष्मीपति अक्षय को धन्यवाद देता हैं और अक्षय अपनी सफलता की कड़ी मेहनत को समझ रहा हैं। उसने समझा कि संघर्ष एक निश्चित रूप से चलता रहता है, परिणाम नहीं, और आपके काम में पूर्ण ध्यानदेखी के साथ विश्वास करना।
उसकी कंपनी अब सकारात्मक संचालन के साथ संभव हो गई थी, और दुनिया में बढ़ रही संपत्ति के अमीरों में एक नाम बन गई। अक्षय के संघर्ष और एक मुश्किल समय में उसके साथ खड़े लोगों के आशीर्वाद ने उसे एक पथावलोकन बनाया।