चंपावन का अभिमानी राजा
बहुत समय पहले की बात है, चंपावन के घने जंगल में विक्रम नाम का एक विशाल और शक्तिशाली शेर रहता था। उसकी एक दहाड़ से पूरा जंगल कांप उठता था। विक्रम को अपनी शारीरिक शक्ति पर अत्यधिक घमंड था। वह मानता था कि जंगल में केवल ताकतवर को जीने का अधिकार है और कमजोर जीव केवल दया के पात्र हैं। वह अक्सर छोटे जानवरों का मजाक उड़ाता था और उन्हें तुच्छ समझता था। उसी जंगल में निक्की नाम की एक नन्ही और दयालु गिलहरी भी रहती थी, जो अपनी समझदारी और सेवा भावना के लिए जानी जाती थी।
मुसीबत का काला साया
एक दिन शिकार की तलाश में विक्रम जंगल के एक ऐसे हिस्से में चला गया जहाँ शिकारियों ने लोहे के नुकीले तारों का एक मजबूत जाल बिछा रखा था। विक्रम का भारी पैर उस जाल में बुरी तरह फंस गया। उसने अपनी पूरी ताकत लगाकर जाल को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन जितना वह जोर लगाता, जाल उसकी त्वचा में उतना ही गहरा धंस जाता। दर्द और लाचारगी से बेहाल होकर शेर जोर-जोर से दहाड़ने लगा। उसकी चीख सुनकर जंगल के अन्य जानवर वहाँ एकत्र तो हुए, लेकिन शेर के पुराने अत्याचारों को याद करके कोई भी उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया। सबने सोचा कि इस घमंडी राजा को उसके कर्मों की सजा मिल रही है और वे चुपचाप वहाँ से चले गए।
एक छोटी सी आशा
जब विक्रम की हिम्मत पूरी तरह टूट गई और उसकी आँखों से बेबसी के आँसू बहने लगे, तब वहाँ नन्ही गिलहरी निक्की आई। विक्रम की आँखों में पहली बार पछतावे और दर्द के आँसू देखकर निक्की का हृदय पिघल गया। उसने बिना अपनी जान की परवाह किए जाल के मुख्य हिस्से को अपने नुकीले दांतों से धीरे-धीरे कुतरना शुरू कर दिया। शेर ने आश्चर्य और कांपती आवाज में पूछा, “निक्की, तुम मेरी मदद क्यों कर रही हो? मैंने तो हमेशा तुम जैसे छोटे और कमजोर जीवों का अपमान किया है।” निक्की ने मुस्कुराकर कहा, “महाराज, मुसीबत के समय किसी का दुख बांटना और उसकी मदद करना हमारा धर्म है, उसकी पुरानी गलतियों का हिसाब करना नहीं।”
घंटों की कड़ी मेहनत के बाद, निक्की ने जाल को काट दिया और विक्रम आजाद हो गया। उस दिन शेर का दिल निक्की के निस्वार्थ प्रेम और करुणा को देखकर पूरी तरह बदल गया। उसे समझ आ गया कि जंगल का असली राजा शरीर से बड़ा नहीं, बल्कि दिल से बड़ा होता है।
नैतिक शिक्षा
कहानी की सीख: इस पंचतंत्र की नैतिक कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चा बल शारीरिक ताकत या सत्ता में नहीं, बल्कि मन की करुणा, दया और क्षमा में होता है। अहंकार इंसान को अकेला बना देता है, जबकि प्रेम और निस्वार्थ सेवा से दुनिया के हर दिल को जीता जा सकता है।