नमस्कार दर्शकों! स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष बुलेटिन में, जहां आज हम सीधे ‘WhatsApp University’ के कैंपस से आपके लिए एक क्रांतिकारी खबर लेकर आए हैं। सोशल मीडिया पर घूम रहे ज्ञान के महासागर में अब आपको असली और नकली खबर पहचानने के लिए अपने छोटे से दिमाग को कष्ट देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। हमारी महा-यूनिवर्सिटी के कुलपतियों ने मिलकर ‘सच्चाई’ जांचने का एक नया और अचूक ‘फैक्ट चेक’ फॉर्मूला तैयार किया है।
नियम नंबर 1: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ ही परम सत्य है
नए वैज्ञानिक शोध के अनुसार, अगर किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ (कई बार भेजा गया) का लेबल लगा है, तो वह संदेश सीधे देवलोक से उतरा हुआ सत्य है। अब भला सोचिए, जो बात दस लाख लोग एक-दूसरे को भेज चुके हैं, वह गलत कैसे हो सकती है? सत्य बहुमत से तय होता है, तथ्यों से नहीं! इसलिए, अगर कोई आपको मैसेज भेजे कि ‘कल रात 12 बजे नासा ने चंद्रमा पर जलेबी छानते हुए एलियंस देखे हैं’, तो तुरंत इस पर विश्वास करें और कम से कम 11 ग्रुपों में भेजकर पुण्य कमाएं।
नियम नंबर 2: ‘यूनेस्को’ और ‘नासा’ का तड़का
सोशल मीडिया फैक्ट-चेक का दूसरा स्वर्णिम नियम यह है कि संदेश में कम से कम एक बार ‘NASA’ या ‘UNESCO’ का जिक्र होना अनिवार्य है। उदाहरण के लिए, “यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को ब्रह्मांड का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है” या “नासा ने चेतावनी दी है कि दीये जलाने से कोरोना वायरस भाग जाता है”। जैसे ही आप ये जादुई शब्द देखें, अपना दिमाग स्विच ऑफ कर लें। जब नासा के वैज्ञानिक दिन-रात हमारे त्योहारों और घरेलू नुस्खों पर रिसर्च कर रहे हैं, तो हम कौन होते हैं शक करने वाले?
नियम नंबर 3: भावनाएं आहत तो खबर सौ प्रतिशत सच!
अगर कोई खबर पढ़ते ही आपके भीतर का राष्ट्रभक्त, धर्मरक्षक या फिर भावुक इंसान जाग उठे और आपके रोंगटे खड़े हो जाएं, तो समझ लीजिए कि वह खबर सौ प्रतिशत प्रमाणित है। ऐसे समय में गूगल या फैक्ट-चेक वेबसाइटों पर जाना सीधे-सीधे समय की बर्बादी है। तथ्य बोरिंग होते हैं, लेकिन अफवाहें मसालेदार और रोमांचक होती हैं। इसलिए, सत्य की नीरस खोज छोड़ें और सोशल मीडिया के रोमांच का आनंद लें।
निष्कर्ष: दिमाग का इस्तेमाल सेहत के लिए हानिकारक है
अंत में, WhatsApp यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों का यही कहना है कि सोशल मीडिया पर रहते हुए खुद के दिमाग का इस्तेमाल करना स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों के लिए हानिकारक हो सकता है। बस ‘कॉपी-पेस्ट’ का बटन दबाएं, ‘शेयर’ की गंगा बहाएं और ज्ञान के इस महाकुंभ में डुबकी लगाकर धन्य हो जाएं। जय हो फॉरवर्ड महाराज की!