सिंघम का नया सिरदर्द: अजय देवगन ने पूछा- पूरे देश को कैसे पसंद आएगी एक हिंदी फिल्म?

बॉलीवुड के हमारे चहेते ‘सिंघम’ यानी अजय देवगन इन दिनों अपनी फिल्मों के साथ-साथ एक बेहद गंभीर और दिलचस्प सवाल को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में अजय देवगन ने हिंदी सिनेमा बनाने की उस चुनौती पर बात की, जिसने आजकल हर बड़े फिल्ममेकर की रातों की नींद उड़ा रखी है। अजय का सवाल सीधा और तीखा है – आखिर एक हिंदी फिल्म पूरे देश के दर्शकों को एक साथ कैसे पसंद आ सकती है?

कश्मीर से कन्याकुमारी तक का वो मुश्किल सफर

अजय देवगन का मानना है कि भारत संस्कृति, सोच और भाषा के मामले में इतना विविधतापूर्ण है कि एक ऐसी फिल्म बनाना जो उत्तर से लेकर दक्षिण तक हर किसी के दिल को छू जाए, लोहे के चने चबाने जैसा है। आज के समय में जब ‘पैन-इंडिया’ फिल्मों का क्रेज सिर चढ़कर बोल रहा है, तब हिंदी फिल्म मेकर्स के सामने यह यक्ष प्रश्न खड़ा हो गया है। आखिर ऐसा क्या परोसा जाए जो मुंबई के मल्टीप्लेक्स से लेकर यूपी-बिहार के सिंगल स्क्रीन और साउथ के दर्शकों को भी अपनी सीट से बांधे रखे?

साउथ का फॉर्मूला और बॉलीवुड की कशमकश

पिछले कुछ सालों में ‘पुष्पा’, ‘आरआरआर’ और ‘कांतारा’ जैसी फिल्मों ने देशव्यापी सफलता का जो स्वाद चखाया है, उसने बॉलीवुड पर दबाव काफी बढ़ा दिया है। अजय देवगन खुद ‘दृश्यम’ और ‘शैतान’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुके हैं, जो पूरे देश में पसंद की गईं। लेकिन उनका कहना है कि हर बार यह जादू दोहराना आसान नहीं होता। जब आप एक बड़े बजट की हिंदी फिल्म बनाते हैं, तो आपके सामने देश की विभिन्न संस्कृतियों की पसंद और नापसंद का ख्याल रखने की बड़ी चुनौती होती है। एक हिस्से को जो कॉमेडी लगती है, दूसरे हिस्से को वो बोरिंग लग सकती है।

काक-वाणी का नजरिया: क्या सच में मुश्किल है डगर?

‘काक-वाणी’ के सिनेमाई गलियारों में चर्चा गरम है कि अजय देवगन की यह चिंता बेहद जायज है। दर्शकों का टेस्ट अब ग्लोबल हो चुका है। अब सिर्फ स्टार पावर के दम पर फिल्में नहीं चलाई जा सकतीं। जब तक कहानी में जमीन की खुशबू और सच्चे जज्बात नहीं होंगे, तब तक फिल्म को ‘यूनिवर्सल’ अपील मिलना मुश्किल है। अजय देवगन जैसे अनुभवी सुपरस्टार का यह बयान इस बात का सबूत है कि अब बॉलीवुड को अपने पुराने ढर्रे को छोड़कर कुछ नया और जड़ से जुड़ा हुआ सोचना होगा। देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में सिंघम खुद अपनी फिल्मों के जरिए इस चुनौती का क्या तोड़ निकालते हैं!


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कागा जी