आखिर क्यों हम अलग हो गए? | Why did we separate?
श्रेया और रोहन बचपन से दोस्त थे। वे दोनों ही एक ही स्कूल में थे और एक साथ क्लास में भी बैठते थे। दोनों ने हमेशा सहयोग और आपसी संबंध के साथ जीवन गुजारा है। लेकिन जब वे दोनों हाई स्कूल में जाये तो वे अलग अलग क्षेत्रों में घर बैठने लगे।
श्रेया का घर पांच मील की दूरी पर था जबकि रोहन का घर स्कूल से दो पटरियों की दूरी पर था। जैसे ही दोनों का घर अलग-अलग हो गया, दोस्ती बढ़ती हुई और वे तमाम हिस्सों में अलग होने लगे।
श्रेया रोहन से जल्दी जल्दी मिलने की कोशिश करती थी और रोहन भी उसे बार-बार मिलने के लिए बुलाता था। इन दिनों श्रेया की ज़िन्दगी बदलने लगी जब उसने एक नए छात्र से दोस्ती की।
जब रोहन ने इस बारे में पता लगाया तो उसे बहुत दुख हुआ लेकिन उसने सोचा कि संबंध को लगातार निभाता रहाएंगे ताकि वे एक ही रहें।
लेकिन श्रेया अब रोहन के साथ नहीं होती थी। रोहन ने उन्हें अपने साथ बिठाने की कोशिश की लेकिन उसके दिल से श्रेया भटक चुकी थी। उसने रोहन से शादी नहीं करने का फैसला कर लिया। रोहन ने उसे एक सीधा सवाल पूछा, “क्या हमारी दोस्ती नहीं थी सच्ची?”
श्रेया ने जवाब दिया, “हमेशा सच्ची दोस्ती थी, लेकिन मुझे इसका अहमियत नहीं मालूम था।”
यह बात श्रेया को फिर से खुशी दे दी। वह जानती थी कि उसके और रोहन के बीच कुछ नहीं बदला था। अब वह रोहन के नए घर में जाती और दोनों दोस्त फिर से एक हो जाते थे।
गत कुछ समय के बाद, श्रेया ने रोहन को एक नुक्ता बताया, “हमारी दोस्ती कमजोर नहीं हो सकती। ऐसे हमें अपनी दोस्ती का महत्व नहीं जाना चाहिए।”
रोहन ने समझा कि दोस्ती न तो कभी समाप्त होती है और न ही दूसरों से बदलती है। वह और श्रेया फिर से एक दूसरे के साथ जल्दी से जुड़ चुके थे।
जबकि श्रेया अपने नए दोस्त से भी अच्छी दोस्ती रखती थी, वह जानती थी कि रोहन से उसके बिना उसकी ज़िन्दगी जंगली दौड़ के जैसी हो जाएगी। श्रेया जानती थी कि अलग हो जाना इतना आसान नहीं होता था, लेकिन दोस्ती को समाप्त करना इससे और भी बुरा हो सकता है।
श्रेया और रोहन की इस स्टोरी से पाता चलता है कि एक दोस्ती दो पार्टनरों से भी ज़्यादा महत्वपूर्ण होती है। दोस्ती समझौते, विश्वास, और सहयोग का नाम है जो हमें सुखी और सफल बनाता है।