Title: दोस्ती की मिसाल
एक छोटे गांव में रहने वाले दो दोस्त थे। उनके नाम थे मोहन और रोहन। मोहन बड़ा होकर व्यापारी बनना चाहता था जबकि रोहन एक नए भारत के लिए नौकरी करना चाहता था। उन दोनों की दोस्ती बचपन से ही थी।
उन दोनों में काफी समय बितने के बाद, मोहन को एक विदेशी देश में व्यापार करने का मौका मिल गया। उसने रोहन को बताया और फिर दोनों ने एक नया सपना देखा।
मोहन और रोहन अब यह बात करते थे कि वे दोनों अपने व्यापार में मिलकर काम करेंगे। मोहन लगभग सभी कामों को देख रहा था और रोहन धारदार बोल रहा था। दोनों ने उन लोगों को उपहार दिया जो उन्हें रास्ते में मिलते थे। वे इन खुशियों को साझा करते थे और वहाँ के बच्चों को सबक सिखाते थे।
वह घरवाले एक साथ रहते थे और वह उन्हें बिना सोचे समझे कोई भी समस्या में सहायता कर देते थे। दोनों को उनके रिश्तेदारों ने पल बड़ा कर दिया।
एक दिन, जब दोनों एक शौकिया स्थान पर गए, तो वहाँ मोहन की अंग्रेजी बोलने की कुछ ज़्यादा देर हो गई। रोहन बहुत तंग आ गए उससे और कुछ नहीं कह पाए। दोनों मज़े में थे और इसे बड़ा नहीं लिया। फिर वे दोनों वहीं बैठ गए और खुश हो गए।
आपस में इस बारे में बात करने से पहले, मोहन अपनी एक दोस्त से मिलने के लिए हमें बताता है। वह ंटोंस था। उस समय वह ऐसे काम में था जो उसे नहीं पसंद था। एक साथ मिलकर, रोहन और मोहन उसे उस रोज काम नहीं जाने की सलाह देते हैं।
दोनों ने अपने सपनों को पूरा करने के लिए मिलकर काम किया और उनकी दोस्ती इस तरह एक मिसाल की तरह थी। दोनों का सपना पूरा हुआ और वह सफलता के शिखर पर पहुँच गए।
बाकी लोग इन दोनों के साथ छोटे-छोटे कामों में निवेश करते थे और दोनों धन संबंधित मशहूर थे। इस तरह उनकी दोस्ती पूरी गाँव में एक मिसाल की तरह सारे लोगों के बीच उजागर हुई।
अब जब भी कोई आपसी विवाद में फस जाता है, तो वह दोनों को समझाता है और उनकी मदद से समस्या को हल कर लेता है। दोनों ने उस गांव को समृद्ध बनाया और वहाँ के लोगों के मध्य एक विशिष्ट सम्बन्ध बनाया।
दोनों मिलकर शौकियों में ज्यादा जाते थे और घर से बाहर बहुत कम समय बिताते थे लेकिन उनकी दोस्ती कभी नहीं टूटी। अब मोहन युवा व्यापक बन चूका था और उस गांव में एक गाड़ी शोरूम चला रहा था। वह मनोहर अर्थात बड़ा स्पोर्ट्स कार होता था।
एक दिन, रोहन जब उसके घर आया, तो वह इस कार में काम कर रहा था। वह उस विशाल कार को देख रहा था और उसके मुंह से कुछ ऐसा ही निकल गया, “वाह, मोहन, काफी बड़ा खरीदा। क्या लोग परेशान नहीं कर रहे हैं?”
मोहन उसे देखकर भाग्यशाली हो गया कि वह एक जीतेंद्र है। लोगों की यादों में याद रखा जाएगा कि वे एक दूसरे के साथ मिलकर अधिक समृद्ध हुए थे और कुछ कर दिखा दिया था।
रोहन और मोहन की दोस्ती उन्हें कभी साथ नहीं छोड़ती थी। आज वे नामी और धनवान हो गए थे, लेकिन उनकी दोस्ती उन्हें हमेशा याद रखेगी।
दोनों ही अपने सपनों के फर्जीवाड़ों से हमेशा मुक्त रहते हैं। वे साथ साथ हमेशा समस्याओं का सामना करते हैं और उन्हें हल करते हैं। इस तरह उनकी दोस्ती सभी लोगों के दिलों में आकर स्थापित हुई।