0

हंस और घमंडी भालू | The Arrogant Bear and the

हंस और घमंडी भालू | The Arrogant Bear and the Humble Swan

एक गहरे जंगल में एक बहुत बड़ा भालू रहता था। वह अपनी ताकत और अपनी स्थानीयता के कारण बहुत घमंडी था। उसे लगता था कि वह सबसे बड़ा है और सबके ऊपर है। इसके बर-बार जंगल में घुमते समय, उसे एक दिल कुश चिड़िया देखीं। यह एक हंस था जो कि बड़ा ही आत्मनिर्भर था। भालू ने हंस की ओर देखा और कहा, “तुझे कैसा लगता है कि तू मुझसे बड़ा हो सकता है?”

हंस ने उत्तर दिया, “हाँ, मुझे नहीं लगता कि मैं तुमसे बड़ा हूँ, लेकिन मैंने सीखा है कि हमें बड़प्पन की कोई मान्यता नहीं होनी चाहिए।”

भालू ने इस पर हंस को मजाक उड़ाने लगा, और फिर उसने उसे लालची बताया और उसे धमकी दी कि आगे से मौका नहीं मिलेगा। भालू के इस ज़िद के कारण, हंस ने खुद को एक दिन बहुत तंग महसूस करने लगा।

उस दिन से पहले वह अपने स्वाभाविक रूप से बहुत खुशली वाली थी, लेकिन अब उसे अच्छा नहीं लग रहा था। वह सोचती थी कि क्या उसे दया और नरमी करने का समय आ गया है।

एक दिन, भालू द्वारा एक वृक्ष को उखाड़ दिया गया था, जिससे शाखाएँ तोड़ दी गईं। हंस ने भालू को धीरे-धीरे देखा, फिर उसने भालू से कहा, “हे भालू! क्या तुम वृक्ष को टूटते हुए नहीं देख सकते? यदि हमें इसको नहीं बचाया, तो हमीं सभी अधिकारी होंगे।”

भालू शर्मिंदा हो गया। उसने हंस के पास जाकर माफी मांगी। यह हंस को बताने से पहले वह नहीं जानते थे कि उसे जो कुछ कहना था, वह सच था।

फिर से पहले की तरह, भालू और हंस एक-दूसरे से दोस्ती करने लगे और एक साथ काम करने लगे। भालू ने अपने घमंड से शिकायत की और उसके बाद से, उसने खुद को धीरे-धीरे ही सुधारते हुए पाया।

इस कहानी का संदेश यह है कि हम और हमारे आस-पास के लोगों में सम्मान और अनुशासन का हमेशा सम्मान रखना चाहिए। भालू के घमंड के दुष्प्रभाव के परिणाम से, वह अपने अकेलापन के दौरान अवसाद महसूस करता था। लेकिन, उसके साथ हंस के आदरणीय आचरण ने उसे संबोधित किया था, जिससे भालू ने अपनी त्रुटियों पर ध्यान केंद्रित करना शुरू किया।

कागा जी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *