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अपना देश, अपनी माँ एक सर्द रात में मेरे अंदर

Title: अपना देश, अपनी माँ

एक सर्द रात में मेरे अंदर कुछ एक अजीब सी उलझन हो रही थी। मैं अपने आप से पूछता रह रहा था कि मैं इस देश के लिए क्या कर सकता हूँ। हमारा देश हमें इतना कुछ देता है फिर भी हमें उठना होता है और उसके लिए कुछ करना होता है। इस समस्या को मैंने फेसबुक पर डाल दिया ताकि लोगों से सलाह लेनी शुरू कर सकूँ। उस समय मैंने एक लड़की से संपर्क किया था, नाम था नीहा।

नीहा से मेरी सलाह लेना बड़ा महत्वपूर्ण साबित हुआ। वह एक दिन मुझसे मिली और मुझे बताया कि वह एक गांव में रहती हैं जो एक बहुत गरीब और असामाजिक गांव है। वह लोगों को जागरूक करने के लिए उस गांव में ही एक अखबार निकालते हैं। मुझे वह अखबार बताने के लिए आग्रह किया था, जो कि उसे निकालने में मदद कर सकता था।

मैं उसे मदद करने के लिए तुरंत ही हाथ बढ़ाने को तैयार था। एक सप्ताह में, मैंने नीहा के साथ उस गांव में जाने का विचार किया। वह मुझे एक मैप बना दी, जिसके द्वारा मैं अपने मंजिल को पहुंच सकता था। गाँव के राहगीरों से मैंने रोड मार्ग और दूरी के बारे में पूछा और भी कई जानकारियां प्राप्त की।

मैंने अखबार बनाने के लिए नीहा के साथ बहुत समय दिया जबकि मैंने अपने योजना को लोगों को समझाने के लिए फ्लायर भी बनाए। लोग काफी संतुष्ट थे, जिससे हमें उत्साह के साथ अखबार के लिए लोगों से जमा करने के लिए जा सकता था।

शुरूआत में लोग काफी आश्चर्यचकित हो गए, और उनमें से कुछ लोगों ने मुझे अखबार के कुछ आर्टिकल लिखने के लिए निमंत्रण दिया। हमारे अखबार के पहले अंक में, मेरा एक लेख शामिल था। उसमे मैने लोगों को उनके हक के बारे में, जागरूक होने के लिए आग्रह किया था। कुछ लोगों ने एक संगठन बनाने की भी बात की जो लोगों को सामाजिक और इस्तेमाली ताकतों से लड़ने की तैयारी करते हैं।

दिन दूनी रात चौथी, हमने अखबार के तीसरे अंक को निकाला। हमारे अखबार ने एक स्वतंत्र समाचार पत्र के रूप में बढ़त बढ़ते प्रतिष्ठा हासिल की। हमारे अखबार की सफलता के बाद, मुझे देश की हर तरफ से प्रशंसा के संदेश मिलने लगे और लोगों से कई संदेश आयें जो मुझसे निर्देश और अनुभव साझा करना चाहते थे।

आज मुझे मलूम है कि देश से कुछ करना जरूरी है, जो मैंने किया। हमारे देश को बढ़ावा देने के लिए एक आम व्यक्ति कुछ भी कर सकता है। हमें यह अनुभव करने की जरूरत होती है, ताकि हमें अपनी माँ को अपना देश बनाने की तैयारी करने में कोई अड़चन न हो।

इस common man से न सिर्फ उस गांव से निकला हुवा अखबार काफी प्रभावी साबित हुआ बल्की देश भर के स्वतंत्र लोगों से एक लड़ाई शुरू हुई जो कि उन्हें समाज के विकसित होने के लिए आगे बढ़ने से रोक रही थी। इस एक सामान्य इंसान ने अपने आप को अपने देश और माँ से जोड़ दिया जिसने देश के हर व्यक्ति को अपने करने के लिए ईनाम दिया।

कागा जी

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