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आत्मा के उद्धार में सद्गुरु की महत्ता आत्मा की ऊर्जा

Title: आत्मा के उद्धार में सद्गुरु की महत्ता

आत्मा की ऊर्जा संजीवी करने और तन, मन और आत्मा को सुखी बनाने में सद्गुरु का बहुत महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। उनका प्रेरणादायक वचन और उनके संदेश हमें समस्याओं का सामना करने के लिए उत्तेजित करते हैं। इस लेख में, हम आपके साथ कुछ स्पिरिचुअल कोट्स शेयर कर रहे हैं, जो आपकी आत्मा को मन्दिर में ले जाने में आपकी मदद करेंगे।

1. जो बुद्धि प्रशान्त, पापों से रहित तथा ममत्व से रहित हो, वह सचाई को जानता है।
– श्रीमद्भगवद्गीता

2. जो कभी किसी वस्तु की हँसी को नहीं मिलती उसे जिसे आप खुद अनन्त हस्तियाँ बनाए रखते हैं।
– श्री श्री रविशंकर

3. आप अपने निज के साथ हमेशा सहज मिल जाएंगे। आप सर्वस्व एक ही तथा परमात्मा का हिस्सा हैं।
– श्री श्री रविशंकर

4. हर पल धन्यवाद देने की विशेष जरूरत नहीं होती। हम सभी के लिए एक महान उसूल है – सबके साथ अच्छा व्यवहार कीजिए।
– नाथाशंकरा

5. समस्त विरोध, समस्त आपत्ति, समस्त दुःख और दरिद्रता को दूर भगाएँगे हम जब हम सभी में मौजूद भगवान को देखने में सक्षम होते हैं।
– श्री श्री रविशंकर

6. हमारे गुरु हमें आदर देना सिखाते हैं, ऑर्गेनाइज करना सिखाते हैं, और सबके साथ भागीदार बनना सिखाते हैं।
– नाथाशंकरा

7. जिस कारण से आप जन्म लिए हैं, उसके बारे में आप विस्तार से सोचने लगते हैं। लेकिन आपका अंतिम कारण मुक्ति होना चाहिए।
– श्री श्री रविशंकर

8. जिस प्रकार जल शीतल और शुद्ध करता है, वैसे ही जो केवल अपने प्रभु का स्मरण करते हैं, उनकी क्षुधा, दुख और संशय संभवतः समाप्त हो जाते हैं।
– श्रीमद्भगवद्गीता

9. अगर आप हर पल ऐसा व्यवहार करें जो दूसरों को आनन्द देता है तो आप आगे बढ़ने के लिए धैर्य और सांत्वना बनाए रखेंगे।
– नाथाशंकरा

10. अगर आप आपके स्वयं के बारे में बुरी तरह से सोचना बंद कर देते हैं, और यह जानते हुए कि जहां आप हैं, वहाँ बहुती कम लोग होंगे, तो आप आत्मसम्मान और समझदार बन जाएंगे।
– नाथाशंकरा

11. जब आप आपकी बाहरी ज़िन्दगी में ज्यादा विश्वास रखेंगे तब बहुत से रोग खुद-ब-खुद मिलेंगे, जिनका परिणाम आपको आपकी आत्मा को घाव देती हैं।
– श्री श्री रविशंकर

12. संक्षिप्तता, नीचे से मुहैया की गई सूक्ष्म भावनाओं का शक्तिवर्धन कर देती है।
– नाथाशंकरा

13. वो एक कुंडली है जो कि सभी में होती है और हर कोई ज़िंदगी की नई उड़ानों पर उड़ने में सयंत्रित होती है।
– नाथाशंकरा

14. जो व्यक्ति आत्मा से जुड़ गया है, उसके सारे कार्य सहज और समानतर तत्त्व का संयोजन होते हैं।
– श्री श्री रविशंकर

15. धर्म का काम हमें भ्रम से बाहर निकालकर मुक्ति की दिशा में अग्रसर होने में मदद करता है।
– श्रीमद्भगवद्गीता

ये थे कुछ स्पिरिचुअल कोट्स जो आपकी आत्मा को तंदुरस्त और निरोगी बनाए रखने में मददगार साबित होंगे। सद्गुरु के संदेश और उनका उपदेश एक दिन।

कागा जी

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