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एक खोजसचिन ने अपने दोस्त को कहा था कि

Title: एक खोज

सचिन ने अपने दोस्त को कहा था कि वह एक रहस्यमय जगह की खोज करना चाहता है। उसे लगा कि यह जगह उसे अपने विद्यालय में सिखाई जाने वाले विषयों से अलग होगी। सोच-समझकर उसने सुबह से हर दिन उच्च स्कूल पहुंचने से पहले एक छोटे से रोड के गौर की खोज करना शुरू किया।

पहले तो सभी रोड्स एक जैसे दिखते थे। उसे लगा कि वह कभी अपनी खोज पूरी नहीं कर पाएगा। लेकिन अचानक उसे एक रोड का पता चला जो अलग नज़र आता था। वहाँ एक मकान था, जिसका विवरण लिखा था, “केवल निजी अधिकार हैं।”

सचिन उस मकान की तरफ बढ़ने लगा और उसने दुकानदार को देखा जो मकान के बाहर खड़ा था। सचिन ने उससे पूछा, “क्या यह मकान खुला है?”

दुकानदार ने उतरते हुए सूर्य की ओर इशारा करते हुए कहा, “हालांकि इसे आसान नहीं होगा। आपको अपने पास जवाब होना चाहिए।” उसने एक छोटे से टुकड़े का प्रदर्शन किया जिसपर कुछ गणितीय संकेत हुए थे। सचिन ने इसे पढ़ने की कोशिश की, लेकिन वह इसे समझ नहीं पा रहा था।

दुकानदार ने उससे कहा, “इसमें कोई खास बात नहीं है। कुछ गणितीय सॉल्यूशन होगा. उसमें से कुछ नंबर से कुछ काट देने होंगे और यह एक विशेष नंबर निकलेगा. जब आप इसे प्रवेश करेंगे तो आपको इसे समझ में आ जाएगा।”

सचिन के पास यह धारणा थी कि मज़बूत विश्वासी होने के साथ-साथ आंखों का विस्तार होता है। खोज करते करते उसने बार-बार इस मकान से गुजरा था इसलिए उसे इस गणितीय समस्या को हल करने का अंतिम तरीका ढूंढने में कोई परेशानी नहीं थी।

वह दोबारा उस मकान के सामने खड़ा हुआ और बाहर लगे गणितीय समस्या का समाधान याद आया। उसने उसे प्रवेश करने के लिए सही नंबर की संख्या का प्रदर्शन कर दिया और मकान में प्रवेश कर लिया।

एक बार अंदर पहुंचने के बाद, सचिन के सामने एक खूबसूरत बाग सा था। इसमें फूल और पेड़ थे जिनकी खुशबू महकती थी। सचिन उस खूबसूरत दृश्य के सामने अचंभित हो गया था। उसने अपनी नाक में खुशबू को समझा। उसने यह भी महसूस किया कि यहाँ आकर वह खुश हो गया है।

सचिन ने खूबसूरत मकान के दरवाज़े को खोला और अंदर चला गया। तभी उसे बेहतर समझने वाले एक नाम से एक युवा के सामने खड़ा देखा। पहली नज़र में सचिन को लगा कि यह युवा कुछ प्रतिबद्धता से अपने कमरे में लिप्त है। उसने उसे देखा और कहा, “क्या आप मेरी मदद कर सकते हैं?”

युवा ने सचिन को थोड़ा विचलित भाव से देखा और फिर धीरे से एक बात कहते हुए कहा, “हां, मैं आपकी मदद कर सकता हूं।”

सचिन उसे एक शब्द नहीं बोला था। उसने अपनी प्रतिबद्धता दिखाते हुए कहा, “मैं जो कुछ भी कहूंगा, उसमें सच्चाई होगी और आपको अपनी प्रतिबद्धता को निभानी होगी।”

युवा सचिन की ओर देखते हुए अपनी प्रतिबद्धता दर्ज करते हुए एक पत्र लिखा। इसमें लिखा था, “यह एक स्कूल है, जिसकी व्यवस्था अनुशासन और प्रतिबद्धता के आधार पर है।”

उसने सचिन को यह पत्र दे दिया और कहा, “आपके विद्यालय में जाएं और यह वहाँ दिखाएं।”

सचिन ने अविश्वसनीय रूप से यह पत्र लेते हुए एक प्रतिबद्धता की थी। उसने यह सब देखा था, सब स्वीकार किया था और अब उसे लाखों कोशिशों के बाद यह पत्र मिल रहा था।

यह अंतिम रहस्यमय जगह उसे फायदे और जानकारी से भर गया। वह पूरी दुनिया को अपने रहस्य की खोज के बारे में बताने को तैयार था।

कागा जी

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