Title: एक यादगार शाम
अरुण और सुमित्रा की शादी के दिन था। वह एक स्थानीय शादी में उपस्थित थे जहाँ बहुत से लोग रात तक नाचते रहते हैं। लेकिन आज शादी में कुछ अलग था। वह लोग थोड़ी अलग तारीख़ से शादी कर रहे थे और उनके लिए सब कुछ स्पष्ट नहीं था।
शाम के समय सारे लोग उत्साहित थे और नाचते रहते थे, लेकिन अरुण ने सुमित्रा को एक जगह पर खड़ा करके समझाया कि वह उससे बहुत प्यार करता है और उसके बिना जीवन अधूरा रह जाएगा।
सुमित्रा मुस्कुराते हुए बोलीं, “मैं भी आपसे बहुत प्यार करती हूँ, अरुण।”
दोनों ने एक दूसरे को जड़ से लगा लिया और सभी लोगों ने अपने अपने हाथ तालों पर बजाना बंद कर दिया और खुशी से उछलते हुए वहाँ से निकल गए।
लेकिन कुछ देर बाद अरुण ने सुमित्रा की तलाश करना शुरू कर दिया। वह सभी जगहों पर ढूंढता रहा लेकिन सुमित्रा कहीं भी नहीं मिलती थी।
आखिरकार वह एक खेत में पहुँच गया जहाँ उसे अपनी दुवे देने के लिए एक वृक्ष मिला। अरुण ने वहाँ खड़े होकर उसे आराधना की और दुआ मांगी कि वह उसकी सुमित्रा को फिर से मिला दे।
मगर झील के करीब वह एक टूटी हुई आबादी देखता है, जहाँ उसने कोई होटल नहीं देखा था। इस सोच में ही उसे अपनी तरफ से कुछ वजह महसूस होती हैं, क्योंकि उसे पता था कि सुमित्रा भी से अकेले में इस स्थान पर हो सकती हैं।
अरुण ने चौपाल की तरफ दौड़ा जहाँ वह एक आदमी से मिल रहा था। उन्होंने जब उससे पूछा कि वह अपनी पत्नी सुमित्रा को देखा है तो उसे याद आ गया कि वह लोग उनके शादी में उपस्थित थे।
वह उसे बताता हैं कि सुमित्रा उधर एक प्रायवेट जगह में हो सकती हैं जो आसपास ही होगी। अरुण ने धन्यवाद देते हुए उससे वहाँ का रास्ता पूछा और फिर वह उधर चला गया।
वह लगभग आधे घंटे तक चलता रहा लेकिन उसे सुमित्रा को नहीं मिल सका। वह थका हुआ था और तभी उसके सामने एक प्राइवेट बंगला आया। वह वहाँ से आगे नहीं जा पा रहा था लेकिन सुमित्रा की तलाश में वह आगे जाने के लिए नहीं रुकता था।
थोड़ी देर के बाद, वह मोटर साइकिल से उधर जा सकता था। उसने उस प्राइवेट बंगले के आगे जा कर मोटर साइकिल खड़ी की और जोर से घंटी बजाई। ये सोचते हुए कि सुमित्रा इस जगह पर हो सकती हैं और उसे उसके स्कूटर की आवाज़ सुनाई दी थी।
थोड़ी देर बाद पता चलता हैं कि सुमित्रा उस बंगले में थीं और उससे उसका एक परिचित था। अरुण ने एक जानबूझकर तरीके से एक नक्शा बनाया जिसमें सुमित्रा के साथ कुछ स्थानों के नाम थे।
उसके बाद, उसने एक आदमी को पैसे दे कर उसके साथ चलते हुए सुमित्रा को ढूंढ़ने की जिम्मेदारी दे दी।
लेकिन कुछ देर बाद वह आदमी वापस आ गया और बता यह कि सुमित्रा तो डीजे पर हैं और उसे साथ लाने का प्लान तैयार हैं। अरुण को उसके साथ चलना पड़ा और उन्हें लगता हैं कि वह अगले पाँच सालों तक याद रखेंगे जब वह सुमित्रा से पहली बार मिले थे।