केजरीवाल का ‘डबल रोल’: दिल्ली में झप्पी, पंजाब में लाठी!

नमस्कार दोस्तों! ‘काक-वाणी’ के विशेष व्यंग्य मंच पर आपका स्वागत है। हाल ही में ‘फ्रंटलाइन मैगजीन’ ने एक बहुत ही ‘गंभीर’ खोज की है—उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी (आप) एक भारी राजनीतिक संकट से जूझ रही है! अरे भाई, इसके लिए मैगजीन छापने की क्या जरूरत थी? यह तो वही बात हो गई कि ‘सूरज गर्म है’ की खोज के लिए कोई नोबेल पुरस्कार मांग ले!

खैर, असली संकट यह नहीं है कि पार्टी के नेता ईडी और सीबीआई के चक्कर काट रहे हैं, असली संकट तो ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन और पंजाब के बीच फंसा हुआ ‘आप’ का आत्मसम्मान है।

दिल्ली में इलू-इलू, पंजाब में ‘दिशुम-दिशुम’!

आम आदमी पार्टी की राजनीति आजकल बॉलीवुड की किसी मसाला फिल्म जैसी हो गई है। दिल्ली में राष्ट्रीय मंच पर अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के दिग्गज नेता एक-दूसरे के गले में हाथ डालकर समोसे खाते हैं, जैसे कुंभ के मेले में बिछड़े भाई मिल गए हों। लेकिन जैसे ही इनकी फ्लाइट अमृतसर लैंड करती है, यह प्यार सीधा ‘शोले’ के गब्बर और ठाकुर की दुश्मनी में बदल जाता है!

पंजाब में भगवंत मान साहब गरजते हैं—”हम कांग्रेस को छोड़ेंगे नहीं!” और दिल्ली से तुरंत व्हॉट्सएप मैसेज आता है—”अरे चुप रहो भाई, शाम को राहुल जी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी है!” बेचारे पंजाब के ‘आप’ कार्यकर्ता सदमे में हैं कि कांग्रेस वाला सामने आए तो उसे चाय पिलाएं या जेल भिजवाएं!

भगवंत मान की ‘कॉमेडी’ और दिल्ली की ‘ट्रैजेडी’

पंजाब में ‘आप’ का असली संकट यह है कि वहां की जनता ने उन्हें कांग्रेस के ‘विकल्प’ के रूप में वोट दिया था। अब अगर वे दिल्ली के चक्कर में पंजाब में भी कांग्रेस के साथ गलबहियां करेंगे, तो पंजाब का वोटर तो यही कहेगा—”साड्डा कुत्ता कुत्ता, तुहाडा कुत्ता टॉमी?”

भगवंत मान साहब दिन-रात यह गणित बिठाने में लगे हैं कि पंजाब में कांग्रेस को ‘भ्रष्टाचारी’ बोलना है या ‘गठबंधन का साथी’। ‘कट्टर ईमानदारी’ का यह नया मॉडल दुनिया के किसी राजनीति शास्त्र में नहीं मिलता, जहां एक ही पार्टी एक राज्य में ‘जानी दुश्मन’ है और दूसरे राज्य में ‘जिगरी यार’!

सर्कस का आखिरी शो

इस पूरे ड्रामे से एक बात तो साफ है—आम आदमी पार्टी ने राजनीति को इतना मनोरंजक बना दिया है कि अब देश की जनता को सिनेमाघरों में जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। ‘फ्रंटलाइन’ वाले भले ही इसे ‘गंभीर राजनीतिक संकट’ कहें, लेकिन ‘काक-वाणी’ की नजर में यह ‘महा-कॉमेडी सर्कस’ है। अब देखना यह है कि चुनाव के नतीजे आने के बाद यह ‘डबल रोल’ सुपरहिट होता है या जनता टिकट के पैसे वापस मांगती है!


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कागा जी