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चाय की दुकान

Title: चाय की दुकान

बचपन से ही रमेश को चाय बनाना बहुत पसंद था। उसे ये काम करने में समय बिताना बड़ा मज़ा आता था। कभी-कभी वो दोस्तों को भी अपनी दुकान पर चाय पिलाता था। उसे खुशी होती थी कि लोग उसकी चाय को काफी पसंद करते थे।

लेकिन उसके परिवार वाले इसे कुछ अजीब समझते थे। उन्हें लगता था कि रमेश ज्यादा चाय बनाने से पढ़ाई छूटने लगेगी। ये सोचकर उन्होंने रमेश की दुकान बंद कर दी।

रमेश को ये नहीं समझ में आया। वो खोया सा महसूस करने लगा। उसे अपने पेड़ों के नीचे जाकर अकेलापन का सामना करना पड़ता था। अधिक समय बिताने से वो तड़पना शुरू कर देता था।

एक दिन रमेश की नज़र एक नई दुकान पर पड़ी जो अभी-अभी खुली थी। वो सोचा कि क्या वो भी दुकान खोले। लेकिन उसे अपनी पढ़ाई तो करनी होती है। वो मोटी लगातार अपनी पढ़ाई करने लगा।

रमेश ने ध्यान नहीं दिया कि वो समय कब बीत गया। बस फिर एक दिन आ गया जब वो उस दुकान के सामने खड़ा हुआ।

दुकान में दो लड़के थे जिन्हें देखकर रमेश को थोड़ी देर तक समझ नहीं आया कि उनसे कौनसा काम होगा। उसे दुकान में कुछ अजीब सा महसूस होता था। वो सोचने लगा कि ये लोग क्या खरीदने आए होंगे।

रमेश ने धीरे-धीरे दुकान में जाकर एक लड़के से पूछा कि आपको क्या चाहिए। लड़का बताता है कि मुझे चाय चाहिए।

रमेश के मन में बड़ा खुशी हुई। वो फिर से कुछ पुरानी बातें याद करने लगा। उसे उसकी दुकान की याद आगई। वो सोचा कि क्या उसे भी एक छोटी सी दुकान खोलनी चाहिए।

रमेश ने लड़के को चाय दी और उससे पूंछा कि आपको चाय कैसी लगी। लड़का ने कहा कि बहुत अच्छी थी। रमेश को और भी ख़ुशी हुई।

रमेश को फिर से चाय की दुकान खोलने की सोच ने उसे और अधिक जोश दे दिया। वो अपनी मां से बात करके यह काम शुरू करना चाहता था।

रमेश की मां इस तबके में उसका साथ नहीं देना चाहती थी। वो समझती थी कि रमेश की पढ़ाई खराब हो जाएगी। लेकिन रमेश का सपना इतना बड़ा था कि उसकी मां ने अंततः उसकी ईच्छा को समझ लिया।

रमेश ने फिर एक दुकान खोली जिसमें वो अपना मनपसंद लड़का खुश करने के लिए चाय बनाता था। उसकी सफलता अत्यधिक थी। उसकी दुकान में कुछ समय बाद से उसे अपनी महनत का फल मिलने लगा।

रमेश की आखिरी मेहनत ने उसे उसकी मनपसंद दुकान में उसकी पसंद की हर चीज़ हासिल करने में मदद की। वो कामयाबी का आनंद लेते हुए गुड़िया और कंधे पर लोड हुए उपहारों से ऊँची खुशी महसूस करता था।

इस नज़रिए से रमेश को अचानक जगा दिया। उसकी आंखें खुल गयी। कुछ देर में उसे सब समझ में आ गया। वो जान गया कि उसके सपने सच होते हैं।

रमेश ने अधिक समय ना गंवाते हुए अपनी पढ़ाई भी जारी रखी। उसने अपने आपको बलवान बनाने में सफलता हासिल की और अपने लक्ष्य की दिशा में आगे बढ़ते रहा।

आज रमेश एक सफल चाय की दुकानदार हो गए हैं। उसकी चाय शहर में बहुत मशहूर हो गई है। उसके मुस्कुराते चेहरे से लोगों को सबसे ज्यादा प्रसन्नता मिलती है।

आज रमेश अपनी चाय के नाम को इतिहास में एक उजागर नाम प्रदान कर चलते हैं।

कागा जी

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