ट्यूशन टीचर
कलेश आरामपुरा एक ट्यूशन सेंटर में पढ़ाई करने जाते थे। सेंटर स्कूल से थोड़ा दूर था और कोई बच्चा ज्यादा उत्साहित नहीं था पढ़ाई जाने के लिए। कलेश को भी सब इसलिए मजबूरी से ही जाना पड़ता था।
कलेश की मां एक एकल माता थीं, जो कि बेहद संघर्ष कर आज भी परिवार को चला रही थीं। कलेश भी अपनी मां का उत्साही सस्ता कलेश करे कामाई करता था। वह ट्यूशन सेंटर से 300 रुपये तक महीना कमाता था। उसे उस पैसे से अपनी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश करनी पड़ती थी।
एक दिन कलेश का ट्यूशन टीचर ट्यूटरियल के दौरान काफी गुस्से में आ गया। उसने सबको बोला कि उन्हें महीने के अंत तक सभी नोट्स देने होंगे। कलेश को नोट्स लेने के कई तरीके नहीं थे। उसका भी उत्साह उस दिन सबसे कम हो गया था।
अगले दिन कलेश नोट्स लेने के लिए ट्यूशन सेंटर पहुंचा। वह उसी दौरान देखता है कि सिर्फ वही टीचर उनके खिलाफ हैं बाकी सब टीचर काफी दयालु थे। वह अपने मित्रों को बताता है लेकिन जो सहयोग वह उम्मीद कर रहा था उस से तो दूर ही था।
कुछ दिनों के बाद कलेश की समस्या अंततः उसकी मां के सामने पहुंचती है। उसने सोचा कि अगले महीने का ट्यूशन छोड़कर पैसों को बचा कर उसे स्कूल से नोट्स ले आना चाहिए। यह फैसला उसके बहुत मुश्किल था क्योंकि उसे समझ में नहीं आता था कि कैसे वह अपनी पढ़ाई जारी रख सकता है और पैसे भी बचा सकता है।
कुछ ही दिनों के बाद, कलेश की मां ने एक दोस्त से भेजवाई हुई किताब सँवारते हुए कलेश को धन्यवाद दिया। बच्चों के नोट्स लेने में बहुत खर्च होता है।
पर इस किताब ने कलेश को अपने दोस्ती वाले टीचर से महसूस कराया, जो पढ़ने में थोड़ा अलग थे। वह टीचर साधारण टीचर की तुलना में काफी योग्य नहीं थे। लेकिन उनके अनुभव से कलेश को बहुत कुछ सीखने को मिला।
वह टीचर बच्चों को विभिन्न तरीकों से समझाने के लिए नए-नए तरीके बनाते थे। उन्होंने कलेश को उसी ट्यूशन सेंटर के अन्य टीचरों और स्टूडेंट्स के साथ एक प्रसंस्करण के संदर्भ में अपनी स्पष्ट और सामग्री भरी प्रस्तुतियों से नवीनीकृत किया।
कलेश को पहले से ही उस टीचर से अधिक समझ और सूझ थी। वह कुछ यूट्यूब वीडियो मैप टाउंटर्स को देखकर पढ़ने का ढंग सीख रहा था। अब उसके सस्ते कलेश से उसकी पढ़ाई और समझ में बहुत फर्क आने लगा था।
कुछ दिनों में, उस दिन से पहले कलेश ने जो समाधान नहीं ढूँढ पा रहा था, उसे उस टीचर ने आसान कर दिया था। उसे पूरा महीना नोट्स बचा सका था, उसने मां को खुश किया जो अमीर नहीं थीं।
तब से, कलेश ने वह टीचर की मानसिक और आत्मिक संगत ताकत को देखते हुए जीवन में बेरोजगारी और क्षय दूर करने की कोशिश की। अधिक समय उस ट्रेनर से गुरुत्वचर्य लेते हुए उसने जीवन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों को सहीतरीके से निभाना सीखा जिसने उसे एक अंग्रेजी जॉब मिला हर जोब सीख सकता है।
आखिरकार, कलेश को महसूस नहीं होता था कि अधिक समय वह टीचर के साथ पढ़ना और समय बिताना उसे आलस्य का एक कटु स्तर नहीं था। वह थान बाद मुंबई के सबसे अत्यंत लोकप्रिय एयरहोस्टेस के रूप में चयनित हो गई थी।
कलेश का ट्यूशन टीचर ने अंतत: उसे सफलता में नहीं ही सहयोग दिया, बल्कि वह उससे कहीं अधिक निरंतर में पार, उन्हें प्रेरित किया और उसे मजबूती की कसौटी पर खड़ा कर दिया।