नासा की मुहर और यूनेस्को का अवार्ड: व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का परम ज्ञान

सुबह के ठीक छह बजते ही जब आपके फोन की घंटी बजती है, तो समझ लीजिए कि ज्ञान की देवी साक्षात आपके इनबॉक्स में उतर चुकी हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं दुनिया के सबसे बड़े, सबसे सस्ते और बिना किसी परीक्षा के सीधे डॉक्टरेट की डिग्री देने वाले संस्थान—‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ की। इस प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के चांसलर और प्रोफेसर आपके वही फूफाजी या दूर के मौसाजी हैं, जिनका मुख्य काम सुबह उठकर ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ के बैकग्राउंड म्यूजिक के साथ देश-दुनिया को सुधारने वाले चमत्कारी संदेश भेजना है।

यूनेस्को का वो ऐतिहासिक ‘अवार्ड’

इस विश्वविद्यालय का सबसे सक्रिय और पसंदीदा विभाग है ‘यूनेस्को विभाग’। हर दूसरे महीने यूनेस्को के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचता, सिवाय हमारे राष्ट्रगान या हमारी संस्कृति को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ घोषित करने के। हमारे व्हाट्सएप वैज्ञानिकों के अनुसार, यूनेस्को के अधिकारी साल भर केवल भारत के त्योहारों, गानों और यहां तक कि हमारे देशी नुस्खों को ‘वर्ल्ड बेस्ट’ घोषित करने के लिए फाइलें दबाए बैठे रहते हैं। हालांकि, जब आप यूनेस्को की असली वेबसाइट पर जाएंगे, तो बेचारे इस बात से बिल्कुल बेखबर मिलते हैं। पर सच से व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं का क्या लेना-देना? उन्हें तो बस ‘फॉरवर्ड’ का बटन दबाना है।

₹2000 के नोट में नैनो-जीपीएस चिप का चमत्कार

आपको वो दौर तो याद ही होगा जब गुलाबी नोट बाजार में आए थे। तब इस यूनिवर्सिटी के महाज्ञानियों ने दावा किया था कि इस नोट में एक ऐसी गुप्त ‘नैनो-जीपीएस चिप’ लगी है जो जमीन के 120 फीट नीचे दबे होने पर भी सीधे सैटेलाइट को सिग्नल भेज देगी। टीवी चैनलों ने भी इस पर बड़े-बड़े ग्राफिक्स चला दिए। लेकिन जब आरबीआई ने साफ किया कि ऐसी कोई चिप अस्तित्व में ही नहीं है, तो हमारे व्हाट्सएप प्रोफेसरों ने बिना जरा भी शर्मिंदा हुए अगला फॉरवर्ड तैयार कर लिया—”इलायची और कपूर सूंघने से ऑक्सीजन लेवल 200% बढ़ जाता है!”

काक-वाणी की नसीहत: कौआ कान ले गया, तो पहले कान देखो!

इस यूनिवर्सिटी की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां ‘फैक्ट’ (Fact) यानी तथ्य नाम की चीज को देश निकाला दे दिया गया है। अगर किसी संदेश के अंत में लिखा हो—’इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक कोई शुभ समाचार मिलेगा’, तो समझ लीजिए कि वह संदेश सीधे ब्रह्मांड के केंद्र से आया है।

काक-वाणी का सीधा और सटीक कहना है कि जब कोई आपसे आकर कहे कि “कौआ आपका कान ले गया”, तो पहले अपने कान को हाथ लगाकर देखें, आसमान में उड़ते कौए के पीछे लाठी लेकर मत दौड़िए। अगली बार जब भी कोई ‘नासा’ की मोहर लगा हुआ या ‘प्लास्टिक की पत्तागोभी’ वाला सनसनीखेज वीडियो आए, तो अपनी उंगलियों को थोड़ा आराम दीजिए। याद रखिए, हर चमकती हुई चीज सोना नहीं होती और हर फॉरवर्ड किया गया ज्ञान सच नहीं होता!

कागा जी