‘मार्गदर्शक मंडल’ से शतकीय सलाम: आडवाणी जी का ‘रथ’ और आज का ‘राजपथ’

इकोनॉमिक टाइम्स ने जब लिखा कि “भारत रत्न लाल कृष्ण आडवाणी जी के 100 वर्ष: सेवा, विचारधारा और राष्ट्र-निर्माण का जीवन”, तो काक-वाणी के दफ्तर में रखी काठ की पुरानी कुर्सी भी भावुक होकर चरमरा गई। शतकीय मुकाम पर पहुंचे देश के सबसे स्थायी ‘प्रधानमंत्री-इन-वेटिंग’ को ढेर सारी शुभकामनाएं! वैसे, भारतीय राजनीति में 100 की उम्र तक पहुंचना उतना मुश्किल नहीं है, जितना 10 साल तक ‘मार्गदर्शक मंडल’ में बिना कुछ बोले शांति से मुस्कुराते रहना।

रथ की धूल और आज की मखमली गाड़ियां

आडवाणी जी वही महानुभाव हैं जिन्होंने 90 के दशक में सोमनाथ से अयोध्या तक ऐसा रथ दौड़ाया था कि दो सीटों पर सिमटी पार्टी अचानक सत्ता के गलियारों में गूंजने लगी। लेकिन हाय रे राजनीति का दस्तूर! जिसने पसीना बहाकर पथरीली जमीन पर सड़क बनाई, आज उसी सड़क पर नई पीढ़ी की बुलेट ट्रेनें फर्राटा भर रही हैं। आडवाणी जी ने पार्टी का बीज बोया, खाद-पानी दिया, और जब फल चखने का समय आया, तो उन्हें बड़े ही आदर के साथ ‘स्वास्थ्य कारणों’ का हवाला देकर फल की टोकरी से दूर बैठा दिया गया।

‘मार्गदर्शक मंडल’ का परम मोक्ष

आडवाणी जी के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल ‘भारत रत्न’ पाना नहीं है, बल्कि राजनीति में ‘मार्गदर्शक मंडल’ नामक ऐसे दिव्य ‘कोल्ड स्टोरेज’ की स्थापना करवाना है, जहां बुजुर्ग नेताओं को बिना रिटायर किए ही ‘अदृश्य’ कर दिया जाता है। सोचिए, कितना महान त्याग है! जिस व्यक्ति ने जीवन भर मुख्य भाषण दिए, आज वे अपने ही घर के सोफे पर बैठकर वर्तमान नेतृत्व द्वारा घर आकर दिए गए भारत रत्न को स्वीकार कर रहे हैं। इसे कहते हैं असली अनुशासन और मौन साधना!

अखबार इसे ‘विचारधारा और राष्ट्र-निर्माण’ कह रहे हैं, जबकि समझदार जनता इसे “नींव के पत्थर की लाचारी” समझ रही है। जब आज के दौर में रोज़ नया इतिहास लिखा और मिटाया जा रहा हो, ऐसे में आडवाणी जी का चुप रहना ही उनकी दीर्घायु का असली राज है।

काक-वाणी का विशेष नमन

काक-वाणी आडवाणी जी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना करती है। हम तो ईश्वर से बस यही प्रार्थना करेंगे कि उन्हें इतनी शक्ति मिले कि वे टीवी पर आज का ‘नया भारत’ और नई भाजपा देखकर भी अपनी पुरानी मुस्कान बनाए रख सकें। आखिर, अपने ही हाथों से बनाए महल में ‘अतिविशिष्ट अतिथि’ बनकर रहने का हुनर हर किसी के बस की बात नहीं होती!


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कागा जी