यूनेस्को का नया फरमान: व्हाट्सएप फॉरवर्ड न करने वालों को मिलेगी नरक में जगह!

नमस्कार! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। हमारे देश में दो तरह की शिक्षा प्रणालियां हैं – एक जो स्कूल-कॉलेजों में दी जाती है, और दूसरी जो ‘शर्मा जी के लड़के’ और ‘वर्मा जी के फूफा जी’ सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ व्हाट्सएप पर बांटते हैं। इस दूसरी यूनिवर्सिटी की डिग्री इतनी ताकतवर है कि इसके आगे हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड के प्रोफेसर भी पानी भरते नजर आते हैं। आज हम लाए हैं इसी यूनिवर्सिटी के कुछ ऐसे क्रांतिकारी आविष्कार और सच, जिन्हें देखकर न्यूटन भी अपनी कब्र में करवटें बदल रहे होंगे।

यूनेस्को का पसंदीदा काम: भारत को अवॉर्ड बांटना

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के सबसे बड़े ‘तथ्य’ के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) के पास दुनिया में और कोई काम नहीं बचा है, सिवाय इसके कि वह हर हफ्ते भारत के राष्ट्रगान, तिरंगे, या फिर भारतीय रेलवे के हॉर्न को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित करे। हाल ही में एक वायरल संदेश में दावा किया गया कि यूनेस्को ने भारतीय व्हाट्सएप एडमिन्स को ‘दुनिया के सबसे जिम्मेदार नागरिक’ का पुरस्कार दिया है। अब इस बात में कितनी सच्चाई है, यह तो पेरिस में बैठा यूनेस्को का अध्यक्ष भी नहीं जानता, क्योंकि वह खुद आजकल हिंदी सीखकर इन मैसेजों को समझने की कोशिश कर रहा है।

मेडिकल साइंस की ऐसी-तैसी: नींबू और गर्म पानी का चमत्कार

यदि आप गंभीर से गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं, तो अस्पताल जाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों (जिन्होंने खुद कभी बायोलॉजी की किताब छूकर नहीं देखी) के अनुसार, सुबह खाली पेट उबला हुआ पानी पीने से न सिर्फ मोटापा, बल्कि इंसान का भूतकाल और भविष्य काल भी सुधर जाता है। एक और वायरल खबर के मुताबिक, अगर आप कान में दो बूंद अदरक का रस डालेंगे, तो आपको सीधे ब्लूटूथ की आवाज सुनाई देने लगेगी। ऐसे क्रांतिकारी आविष्कारों को नोबेल प्राइज न मिलना, पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों की बहुत बड़ी साजिश है।

फैक्ट चेक: सच कड़वा है और फॉरवर्ड मीठा

सच्चाई यह है कि इस यूनिवर्सिटी की खबरों का ‘सत्य’ से उतना ही नाता है जितना एक राजनेता का अपनी चुनावी घोषणाओं से होता है। तो अगली बार जब आपके पारिवारिक ग्रुप में संदेश आए कि ‘इस मैसेज को 11 लोगों को भेजें, शाम तक खुशखबरी मिलेगी’, तो कृपया रुकें। वह खुशखबरी शायद यह होगी कि आपका इंटरनेट पैक खत्म हो गया है और आप कुछ देर के लिए इस फर्जी ज्ञान से मुक्त हो गए हैं। ‘काक-वाणी’ का यही संदेश है – आंखें खोलें, दिमाग चलाएं, और फॉरवर्ड बटन दबाने से पहले थोड़ा शर्माएं!

कागा जी