राधिका आप्टे का सनसनीखेज खुलासा: ‘मैं गोरी नहीं हूँ!’ साउथ फिल्मों में नॉर्थ की हसीनाओं का असली सच

बॉलीवुड की ‘बोल्ड एंड ब्यूटीफुल’ एक्ट्रेस राधिका आप्टे अपने बेबाक अंदाज के लिए जानी जाती हैं। वो जो महसूस करती हैं, बिना किसी झिझक के बोल देती हैं। हाल ही में राधिका ने फिल्म इंडस्ट्री के एक ऐसे कड़वे सच पर अपनी राय रखी है, जिस पर अक्सर लोग पर्दा डालने की कोशिश करते हैं। मुद्दा है—साउथ इंडियन फिल्मों में नॉर्थ इंडियन हीरोइनों का जलवा और गोरे रंग का खेल!

“मैं गोरी नहीं हूँ!” – राधिका का तीखा प्रहार

साउथ की फिल्मों में उत्तर भारत की गोरी-चिट्टी अदाकाराओं को कास्ट करने का ट्रेंड लंबे समय से चला आ रहा है। जब राधिका से एक इंटरव्यू में इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हंसते हुए और बेहद ईमानदारी से कहा, “मैं गोरी नहीं हूँ!” राधिका का इशारा साफ था कि साउथ सिनेमा में गोरी त्वचा (Fair Skin) को लेकर एक अलग ही दीवानगी रही है, जिसके चलते वहां की स्थानीय प्रतिभाओं को कई बार नजरअंदाज कर दिया जाता है।

राधिका ने बिना किसी लाग-लपेट के बताया कि कैसे फिल्म मेकर्स अक्सर ऐसी अभिनेत्रियों की तलाश में रहते हैं जो रंग में बेहद गोरी हों। इसी वजह से नॉर्थ इंडिया की एक्ट्रेस को साउथ की फिल्मों में बड़े पैमाने पर कास्ट किया जाता है, भले ही उन्हें स्थानीय भाषा समझ भी न आती हो।

‘काक-वाणी’ का तीखा नज़रिया: टैलेंट पर भारी पड़ता फेयरनेस का चश्मा?

अब जरा सोचिए, जिस साउथ सिनेमा में रजनीकांत, धनुष और विजय सेतुपति जैसे बेहतरीन और सांवले अभिनेताओं को भगवान की तरह पूजा जाता है, वहीं हीरोइनों के मामले में ‘फेयरनेस’ वाला पैमाना क्यों अपनाया जाता है? यह सवाल सिर्फ राधिका का नहीं, बल्कि हर उस दर्शक का है जो पर्दे पर सिर्फ खूबसूरती नहीं बल्कि असली टैलेंट देखना चाहता है।

साउथ की कई टैलेंटेड डस्की एक्ट्रेसेस को साइडलाइन कर दिया जाता है और बॉलीवुड से गोरी हसीनाओं को साइन कर लिया जाता है। राधिका आप्टे ने खुद रजनीकांत के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘कबाली’ में काम किया है और अपनी सादगी व एक्टिंग से दिल जीता है, लेकिन उन्होंने इस पुरानी सोच पर करारा हमला किया है।

बदलाव की बयार या सिर्फ बातें?

हालांकि, अब OTT प्लेटफॉर्म्स और नए ज़माने के डायरेक्टर्स की वजह से सिनेमा में थोड़ा बदलाव आ रहा है। फिर भी राधिका आप्टे का यह बयान याद दिलाता है कि ग्लैमर की दुनिया में आज भी स्किन टोन एक बड़ा फैक्टर बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि राधिका के इस ‘कड़वे सच’ के बाद क्या फिल्म मेकर्स अपनी सोच का चश्मा बदलेंगे?


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी