वाह रे हमारे देश के परम तेजस्वी नेता! दिन में संसद के भीतर ‘विदेशी ताकतों की साजिश’ पर छाती कूटते हैं, और रात होते ही उसी ‘विदेशी ताकत’ के ग्रीन कार्ड के लिए वाशिंगटन फोन मिलाते हैं। फ्रंटलाइन पत्रिका की रिपोर्ट ने इस बार हमारे नेताओं की इसी ‘अटूट अमरीकी मोहब्बत’ के ऊपर से पर्दा उठा दिया है। काक-वाणी इस अद्भुत प्रेम कहानी को देखकर भावुक है।
नारा ‘स्वदेशी’ का, बच्चा ‘कोलंबिया’ का!
जब मंच पर भाषण देना हो, तो हमारे राजनेता “स्वदेशी अपनाओ” का ऐसा आलाप अलापते हैं कि सुनने वाले को लगे कि ये अभी कुर्ता फाड़कर खादी का झंडा गाड़ देंगे। लेकिन जैसे ही इनके अपने बच्चों की पढ़ाई की बात आती है, इनकी स्वदेशी राष्ट्रभक्ति सीधे न्यूयॉर्क के जेएफके एयरपोर्ट पर लैंड कर जाती है। हमारे इन गरीब-हितैषी राजनेताओं के सुपुत्र और सुपुत्रियां हार्वर्ड, येल और कोलंबिया जैसी ‘साम्राज्यवादी’ यूनिवर्सिटीज में गरीबी उन्मूलन पर शोध कर रहे होते हैं। आखिर भारतीय लोकतंत्र को हांकने के लिए विदेशी बुद्धि की जरूरत तो पड़ेगी ही न?
इलाज भी अमरीकी, और फोटो-ऑप भी अमरीकी!
भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था और आयुष्मान योजनाओं की तारीफ करते थकते नहीं ये नेता, लेकिन जैसे ही इन्हें जरा सी खांसी भी आती है, सीधे बोस्टन के किसी सुपर-स्पेशलिटी अस्पताल का टिकट कट जाता है। लगता है भारतीय डॉक्टरों और अस्पतालों का निर्माण सिर्फ आम जनता की परीक्षा लेने के लिए हुआ है, नेताओं का नाजुक स्वास्थ्य तो सिर्फ अमरीकी हवा में ही ठीक हो सकता है।
और हां, व्हाइट हाउस के लॉन में अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ हाथ मिलाती हुई एक तस्वीर मिल जाए, तो समझिए अगले चुनाव की आधी वैतरणी पार हो गई। उस एक फोटो-ऑप को देश की रैलियों में ऐसे भुनाया जाता है जैसे जो बाइडेन या डोनाल्ड ट्रंप कल सुबह ही भारत आकर इनके चुनावी बूथ मैनेज करने वाले हैं।
पोटोमैक और गंगा का यह पावन संगम
तो कुल मिलाकर बात बहुत साफ है। हमारे नेताओं का तन भले ही गंगा किनारे रैलियों में पसीना बहाता फिरे, लेकिन उनका मन हमेशा वाशिंगटन की पोटोमैक नदी के ठंडे पानी में गोते लगाता रहता है। अमरीकी डॉलर की चमक और वहां की पीआर कंपनियों का जादू अब हमारे देसी लोकतंत्र का मुख्य ईंधन बन चुका है। काक-वाणी का तो यही मानना है कि अगली बार जब कोई बड़ा नेता मंच से “विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप” की बात करे, तो समझ जाइए कि उनके बच्चों का अमरीकी वीजा रिन्यू होने में थोड़ी देरी हो रही है!
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