‘विदेशी हाथ’: भारतीय राजनीति का वह जादुई नुस्खा, जो हर मर्ज की शर्तिया दवा है!

सज्जनों और दुर्जनों, ‘काक-वाणी’ में आपका स्वागत है। हाल ही में ‘फ्रंटलाइन’ पत्रिका ने एक पुरानी घिसी-पिटी सच्चाई पर से धूल हटाई है कि कैसे भारतीय राजनीति में ‘विदेशी हाथ’ का डर दिखाना सबसे पसंदीदा, सस्ता और टिकाऊ खेल रहा है। सच कहें तो, इस अदृश्य ‘विदेशी हाथ’ को तो अब तक भारत रत्न मिल जाना चाहिए था! सोचिए, बिना एक पैसा वेतन लिए, बिना भारत का वीजा लिए, यह हाथ दशकों से हमारी पूरी की पूरी राजनीति चला रहा है।

अदृश्य ‘विदेशी हाथ’: हर नाकामी का सार्वभौमिक बहाना

हमारे देश में शासन चलाना दुनिया का सबसे आसान काम है, बशर्ते आपको इस रहस्यमयी हाथ को सही समय पर कोसना आता हो। सड़क में जानलेवा गड्ढा हो जाए? विदेशी साजिश! प्याज के दाम सौ रुपये पार कर जाएं? अंतरराष्ट्रीय गिरोह का हाथ! युवा रोजगार मांग लें? जरूर इसके पीछे सीआईए या जॉर्ज सोरोस की फंडिंग है! हमारी सरकारों को अपनी नाकामी छुपाने के लिए किसी रिपोर्ट की जरूरत नहीं पड़ती, बस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कीजिए और आसमान की तरफ उंगली उठाकर कह दीजिए, “मित्रों, देश को बदनाम करने के लिए विदेशी शक्तियां सक्रिय हैं।”

इंदिरा गांधी से लेकर आज तक: एक अटूट राजनीतिक परंपरा

यह कोई नया नुस्खा नहीं है। इतिहास गवाह है कि जब 70 के दशक में अर्थव्यवस्था चरमराती थी, तो इंदिरा जी को अचानक ‘फॉरेन हैंड’ का अहसास होने लगता था। आज जमाना बदल गया, नेता बदल गए, लेकिन यह पुराना पैंतरा आज भी उतना ही ताजा है। अब ‘विदेशी हाथ’ थोड़ा डिजिटल हो गया है—कभी यह विदेशी मीडिया की बीबीसी रिपोर्ट में दिखता है, कभी किसी अंतरराष्ट्रीय टूलकिट में, तो कभी विदेशी रिसर्च फर्म के डेटा में। कमाल की बात यह है कि हमारे देश की सरकारें जितनी शक्तिशाली और ‘विश्वगुरु’ बनती जाती हैं, यह ‘विदेशी हाथ’ उन्हें उतना ही ज्यादा डराने लगता है!

जनता के लिए ‘काक-वाणी’ का विशेष परामर्श

इसलिए, हे देश की भोली-भाली जनता! अगर आपके शहर में बिजली कट जाए, या अस्पताल में डॉक्टर न मिले, तो कृपया अपने स्थानीय नेता या सरकार से सवाल पूछकर उनका कीमती समय बर्बाद न करें। समझदार बनिए और अपने मोहल्ले में उस ‘विदेशी हाथ’ को ढूंढिए जो आपकी नाली जाम कर गया है। जब तक हमारे पास दोष मढ़ने के लिए यह सर्वव्यापी ‘विदेशी हाथ’ मौजूद है, तब तक स्वदेशी जवाबदेही मांगने की हिम्मत भी मत कीजिएगा!


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कागा जी