नमस्कार पाठकों! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विशेष बुलेटिन में आपका स्वागत है। देश के करोड़ों स्वघोषित बुद्धिजीवियों के लिए एक बेहद ही गौरवशाली खबर आई है। हमारे प्रिय व्हाट्सएप ग्रुप्स, जो अब तक केवल ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ वाले संदेशों से ज्ञान की गंगा बहाते थे, उन्होंने अब अपना खुद का ‘स्वायत्त फैक्ट चेक विभाग’ खोल लिया है। अब आपको इंटरनेट पर किसी खबर की सच्चाई जांचने के लिए भटकने की जरूरत नहीं है, क्योंकि फूफाजी और मौसाजी की संयुक्त पीठ ने सत्य की नई परिभाषा तैयार कर दी है।
सत्य जांचने का नया और अनोखा ‘ज्ञान-विज्ञान’
इस नए फैक्ट चेक विभाग की कार्यप्रणाली बेहद आधुनिक और क्रांतिकारी है। यहाँ किसी खबर की सत्यता जांचने के लिए किसी प्रमाण, दस्तावेज या सरकारी रिकॉर्ड की आवश्यकता नहीं होती। यहाँ सत्य की एकमात्र कसौटी है – ‘श्रद्धा और फॉरवर्ड की गति’। अगर कोई संदेश सुबह 6 बजे से पहले 100 लोगों को भेजा जा चुका है, तो वह स्वतः ही ‘परम सत्य’ घोषित हो जाता है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के डीन का मानना है कि यदि किसी वायरल खबर में ‘नासा’, ‘यूनेस्को’ या ‘जापानी वैज्ञानिकों’ का नाम शामिल हो, तो उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाना सीधे-सीधे ज्ञान का अपमान है।
चिप से लेकर यूनेस्को अवॉर्ड तक: सब कुछ प्रमाणित!
हाल ही में इस नवगठित विंग ने कुछ ऐतिहासिक ‘फैक्ट चेक’ किए हैं। उदाहरण के लिए, दो हजार के गुलाबी नोटों में छिपी अदृश्य जीपीएस चिप की खबर को इन्होंने ‘सौ प्रतिशत सच’ प्रमाणित किया है। उनका तर्क है कि भले ही आरबीआई को इस चिप के बारे में न पता हो, लेकिन ग्रुप के एडमिन पैनल ने अपनी दिव्य दृष्टि से इसे स्पष्ट रूप से देख लिया है। इसी तरह, यूनेस्को द्वारा भारतीय राष्ट्रगान को ‘विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान’ घोषित करने की खबर को भी इस विंग ने ‘सदाबहार सच’ की श्रेणी में रखा है। इनका कहना है कि यूनेस्को हर साल बजट की कमी के कारण यह सर्टिफिकेट डाक से नहीं भेज पाता, लेकिन व्हाट्सएप पर यह अवॉर्ड हर साल स्वतः ही रिन्यू हो जाता है।
’10 लोगों को भेजें’ और मोक्ष पाएं
व्हाट्सएप फैक्ट चेक विभाग का सबसे बड़ा आविष्कार है – ‘फॉरवर्ड थेरेपी का वैज्ञानिक विश्लेषण’। यदि आप किसी चमत्कारिक संदेश को तुरंत 10 लोगों को फॉरवर्ड नहीं करते हैं, तो आपके जीवन में आने वाली हर छोटी-बड़ी समस्या (जैसे चायपत्ती का खत्म होना या फोन की बैटरी लो होना) को इस फैक्ट चेक विंग द्वारा ‘फॉरवर्ड न करने का वैज्ञानिक दुष्प्रभाव’ घोषित कर दिया जाता है।
अंततः, इस नए फैक्ट चेक का उद्देश्य बिल्कुल साफ है – तथ्यों को तोड़ो, मरोड़ो और सुबह की ‘गुड मॉर्निंग’ वाली चमकीली गुलाब की इमेज के साथ परोस दो। तो अगली बार जब कोई आपको कहे कि ‘नासा ने सूर्य पर चाय की टपरी ढूंढ ली है’, तो बहस न करें। बस उसे ‘व्हाट्सएप वेरीफाइड’ मानकर आगे बढ़ा दें!