व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का नया सत्यशोधक यंत्र: ‘चचा की कसम’ फैक्ट चेक!
स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के विशेष खंड ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में। आज हम बात करेंगे दुनिया के सबसे तेज, सबसे सटीक और बिना किसी बुद्धि के चलने वाले ‘सोशल मीडिया फैक्ट चेक’ विभाग की। वह जमाना गया जब पत्रकार और वैज्ञानिक किसी खबर की पुष्टि करने के लिए सालों रिसर्च करते थे। अब हमारे पास ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के विद्वान प्रोफेसर और पारिवारिक ग्रुप्स के ‘परम पूजनीय एडमिन’ हैं, जो पलक झपकते ही दूध का दूध और पानी का पानी कर देते हैं।
नया पैमाना: ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ ही परम सत्य है
सोशल मीडिया के नए फैक्ट-चेक नियमों के अनुसार, किसी खबर की सत्यता जांचने का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि वह कितनी बार फॉरवर्ड की गई है। अगर किसी मैसेज के ऊपर ‘Forwarded many times’ का ठप्पा लगा है, तो समझ लीजिए कि वह सीधे देवलोक से उतरकर आया है। उसे किसी और प्रमाण की जरूरत नहीं है। अगर उसमें लिखा है कि नासा ने दिवाली के दिन अंतरिक्ष से भारत की सबसे चमचमाती तस्वीर खींची है, तो वह सौ प्रतिशत सच है, भले ही वह तस्वीर किसी चीनी पटाखे के विज्ञापन की क्यों न हो!
घरेलू नुस्खों का ‘व्हाट्सएप’ अप्रूवल
आधुनिक चिकित्सा विज्ञान भले ही वर्षों तक लैब में वैक्सीन और दवाइयों का परीक्षण करे, लेकिन हमारे व्हाट्सएप फैक्ट-चेकर्स के पास हर बीमारी का रामबाण इलाज पहले से तैयार है। कैंसर का इलाज सुबह-सुबह गरम पानी में नींबू निचोड़कर पीने से हो जाता है, और सोने से पहले पैरों के तलवों में तेल घिसने से चश्मे का नंबर गायब हो जाता है। इस ज्ञान की सत्यता की गारंटी इस बात से तय होती है कि इसे ‘पड़ोस वाले शर्मा जी’ के साले के ममेरे भाई ने खुद आजमाया था। ऐसे में डब्ल्यूएचओ (WHO) के डॉक्टरों की डिग्री तो बस एक कागज का टुकड़ा मात्र रह जाती है।
यूनेस्को (UNESCO) का प्रमाणपत्र और कसमों का खेल
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के फैक्ट-चेकर्स का दूसरा सबसे बड़ा हथियार है ‘यूनेस्को’। जब तक यूनेस्को किसी चीज को ‘दुनिया का सर्वश्रेष्ठ’ घोषित न कर दे, तब तक हमारे एडमिन साहब को चैन नहीं आता। हमारे राष्ट्रगान से लेकर हमारे देश की सड़कों तक, सब कुछ यूनेस्को द्वारा प्रमाणित हो चुका है। और अगर फिर भी किसी को शक हो, तो मैसेज के अंत में मिलने वाली धमकी—“अगर इसे 11 लोगों को नहीं भेजा, तो आज शाम तक कोई अनहोनी हो जाएगी”—फैक्ट चेक की अंतिम मुहर होती है। डर के आगे ही सच है, और इसी डर से करोड़ों भारतीय रोज सुबह ‘गुड मॉर्निंग’ के साथ ब्रह्मांड का परम ज्ञान बांट रहे हैं।
जागृत रहिए, दिमाग मत लगाइए!
इस नए फैक्ट-चेक युग में अगर आप तर्क या विज्ञान की बात करेंगे, तो आपको तुरंत ‘ग्रुपद्रोही’ घोषित कर बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। इसलिए, काक-वाणी की सलाह है कि अपनी बुद्धि को लॉकर में बंद रखिए, अंगूठे को चालू रखिए और बिना सोचे-समझे फॉरवर्ड बटन दबाते रहिए। क्योंकि सच खोजना अब सिर्फ एक शगल नहीं, बल्कि व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का राष्ट्रीय कर्तव्य बन चुका है।