प्रणाम! ‘काक-वाणी’ के विशेष स्तंभ ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ में आपका स्वागत है। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा विश्वविद्यालय है जहाँ दाखिले के लिए किसी प्रवेश परीक्षा की नहीं, बल्कि सिर्फ एक सस्ते इंटरनेट डेटा पैक और एक ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाने की क्षमता की आवश्यकता होती है। यहाँ ज्ञान की कोई सीमा नहीं है और तर्क की कोई जगह नहीं है।
यूनेस्को का ‘अथक’ प्रेम और हमारे राष्ट्रीय गौरव
व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के अनुसार, यूनेस्को (UNESCO) का केवल एक ही काम है—हर हफ्ते भारत की किसी न किसी चीज़ को “विश्व का सर्वश्रेष्ठ” घोषित करना। कभी हमारा राष्ट्रगान दुनिया का सर्वश्रेष्ठ घोषित होता है, तो कभी नए करेंसी नोटों में लगी ‘जीपीएस चिप’ को यूनेस्को से विशेष पुरस्कार मिलता है। नासा (NASA) के वैज्ञानिक भी हैरान हैं कि वे करोड़ों डॉलर खर्च करके जो खोज नहीं पा रहे हैं, वह हमारे शर्मा जी के फुफेरे भाई ने सुबह चाय की चुस्की लेते हुए एक ‘फॉरवर्डेड’ संदेश में खोज ली।
कैंसर का इलाज: सिर्फ दो चुटकी हल्दी और एक टोटका
चिकित्सा विज्ञान ने सदियों की मेहनत के बाद टीके और दवाइयां बनाईं, लेकिन व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर्स ने इसका तोड़ दो मिनट में निकाल लिया। “सुबह खाली पेट गर्म पानी में नींबू और बेकिंग सोडा मिलाकर पीने से कैंसर जड़ से खत्म!” आधुनिक डॉक्टर बेचारे अपनी डिग्रियां संभालकर अब ढाबा खोलने की सोच रहे हैं। यहाँ तक कि कोरोना काल में नाक में नींबू का रस डालकर ऑक्सीजन लेवल बढ़ाने का जो ‘अद्भुत’ नुस्खा खोजा गया था, उसे देखकर खुद यमराज भी थोड़ी देर के लिए सोच में पड़ गए होंगे कि अब धरती पर उनका क्या काम बचा?
इतिहास की नई परिभाषा: जब डायनासोर भी करते थे हवन
इस विश्वविद्यालय का इतिहास विभाग तो और भी लाजवाब है। यहाँ ताजमहल असल में एक प्राचीन मंदिर है और सिकंदर केवल इसलिए हार गया था क्योंकि उसके पास व्हाट्सएप ग्रुप नहीं था। इस ज्ञान गंगा का नियम बहुत सरल है—अगर जानकारी के अंत में ‘कृपया इसे 10 लोगों को भेजें, शाम तक शुभ समाचार मिलेगा’ लिखा है, तो वह विज्ञान और इतिहास का सबसे अकाट्य सत्य है।
निष्कर्ष: उंगली को दें आराम, दिमाग को जगाएं
सच तो यह है कि अफवाहों के इस बाजार में सत्य अक्सर दम तोड़ देता है। व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के इस ‘मुफ्त ज्ञान’ से समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण कम और अंधविश्वास ज्यादा फैल रहा है। अगली बार किसी भी सनसनीखेज संदेश को ‘फॉरवर्ड’ करने से पहले अपनी उंगलियों को थोड़ा विराम दें और गूगल बाबा से पूछ लें कि क्या सच में नासा ने दीवाली पर अंतरिक्ष से भारत की चमचमाती फोटो भेजी है या यह किसी चाइनीज झालर का कमाल है!