सोशल मीडिया का नया ‘फैक्ट चेक’: फूफा जी की मुहर ही अब परम सत्य है!

नमस्कार! ‘काक-वाणी’ के ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ विभाग में आपका स्वागत है। आज हम बात करेंगे उस क्रांतिकारी तकनीक की, जिसने दुनिया के बड़े-बड़े वैज्ञानिकों, पत्रकारों और शोधकर्ताओं को चक्कर में डाल दिया है। जी हां, हम बात कर रहे हैं सोशल मीडिया के उस स्वघोषित ‘फैक्ट चेक’ सिस्टम की, जो आजकल हर पारिवारिक व्हाट्सएप ग्रुप में पूरी सक्रियता से चौबीसों घंटे काम कर रहा है।

नया अल्गोरिदम: ‘फॉरवर्डेड’ का मतलब ही सच है

पुराने जमाने के पत्रकार किसी खबर की सत्यता जांचने के लिए सबूतों, तारीखों और सरकारी दस्तावेजों के चक्कर में पड़ते थे। कितने पिछड़े थे वो लोग! हमारे व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के मानद कुलपतियों (यानी आपके और हमारे आदरणीय फूफा जी और मौसा जी) ने इस थकाऊ प्रक्रिया को बेहद सरल बना दिया है। नया नियम बहुत सीधा है: अगर कोई मैसेज ‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ (Forwarded many times) के टैग के साथ आया है, तो वह झूठ हो ही नहीं सकता। भला देश के लाखों लोग बिना सोचे-समझे थोड़े ही कुछ भी शेयर कर देंगे? लोकशाही का असली सम्मान इसी को कहते हैं!

यूनेस्को और नासा की परम स्वीकृति

इस नए फैक्ट-चेक सिस्टम में किसी भी खबर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रामाणिक बनाने के लिए दो वैश्विक संस्थाओं का नाम लेना अनिवार्य है – यूनेस्को (UNESCO) और नासा (NASA)। यदि किसी संदेश में लिखा है कि ‘यूनेस्को ने हमारे देश के राष्ट्रगान को दुनिया का सर्वश्रेष्ठ घोषित किया है’ या ‘नासा ने दीया जलाने से निकलने वाली कॉस्मिक ऊर्जा को कैमरे में कैद किया है’, तो समझ लीजिए कि फैक्ट-चेक पूरा हो गया। इसके बाद अगर कोई सिरफिरा वैज्ञानिक अपनी रिसर्च लेकर आए, तो उसे ग्रुप से सीधे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

‘तर्क’ से बड़ा ‘भावनाओं’ का वजन

आधुनिक व्हाट्सएप फैक्ट-चेकिंग में शुष्क तर्क और निर्जीव विज्ञान की कोई जगह नहीं है। यहाँ असली कसौटी मानवीय भावनाएं हैं। अगर किसी मैसेज को पढ़कर आपके भीतर का गर्व, गुस्सा या डर अचानक हिलोरें मारने लगे, तो वह खबर सौ प्रतिशत सच है। मिसाल के तौर पर, ‘रात को तकिये के नीचे हरी इलायची रखने से नौकरी लग जाती है’ – इस दावे को किसी वैज्ञानिक प्रमाण की जरूरत नहीं है, क्योंकि यह हमारी आस्था का मामला है। इस फैक्ट-चेक की अंतिम मुहर नीचे लिखी उस चेतावनी से लगती है जिसमें लिखा होता है- ‘इसे तुरंत 11 लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी।’

तो प्रिय पाठकों, अगली बार जब आप इंटरनेट पर कोई खबर देखें, तो गूगल करने की मूर्खता न करें। बस अपने पारिवारिक ग्रुप के ‘फूफा जी’ की हरी झंडी का इंतजार करें। क्योंकि आखिरकार, ‘फॉरवर्डेड ऐज रिसीव्ड’ के पीछे छिपी भावना ही इस ब्रह्मांड का अंतिम सत्य है!

कागा जी