व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी के ‘परम सत्य’ और हमारे भोले फूफाजी

हमारे देश में ज्ञान प्राप्त करने के दो ही प्रामाणिक स्रोत बचे हैं – एक हिमालय के तपस्वी और दूसरे आपके परिवार के व्हाट्सएप ग्रुप वाले फूफाजी। ‘काक-वाणी’ की इस विशेष रिपोर्ट में आज हम ‘व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी’ के उन महान वायरल दावों की धज्जियां उड़ाएंगे, जिन्हें पढ़कर न्यूटन और आइंस्टीन की आत्माएं भी अपनी कब्र में कुश्ती लड़ रही होंगी। इस डिजिटल दौर में सच भले ही एड़ी-चोटी का जोर लगा ले, लेकिन झूठ ‘फॉरवर्डेड एज़ रिसीव्ड’ का पंख लगाकर हवा से भी तेज उड़ता है।

यूनेस्को का वो ‘लापता’ बेस्ट राष्ट्रगान का सर्टिफिकेट

हर साल स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के आते ही हमारे पारिवारिक ग्रुप्स में एक संदेश बड़ी तेजी से तैरता है – “यूनेस्को ने भारत के राष्ट्रगान को दुनिया का सबसे सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान घोषित किया है।” इस खबर को पढ़कर ग्रुप के तमाम फूफाजी और मौसाजी ‘गर्व से छाती चौड़ी’ वाला इमोजी भेजने लगते हैं। सच तो यह है कि बेचारे यूनेस्को को खुद नहीं पता कि उसने कब और किसे यह सर्टिफिकेट दिया था। यूनेस्को वाले आज भी पेरिस के अपने दफ्तर में बैठकर वह फाइल ढूंढ रहे हैं, जिसे हमारे व्हाट्सएप ग्रुप्स ने सालों पहले ही ‘अप्रूव’ और ‘वायरल’ कर दिया था।

नासा की लैब से सीधे आपके किचन तक का सफर

व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी का दूसरा सबसे बड़ा वैज्ञानिक संस्थान है – ‘नासा’ (NASA)। अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने वाले नासा के वैज्ञानिकों का आधा समय, व्हाट्सएप के दावों के अनुसार, तुलसी के पत्तों और लहसुन के फायदों पर रिसर्च करने में ही बीत जाता है। “नासा ने माना है कि संस्कृत बोलने से कंप्यूटर हैंग नहीं होता” या “नासा के अनुसार दीया जलाने से ओजोन परत ठीक हो जाती है।” इन संदेशों को फॉरवर्ड करने वाले हमारे स्वघोषित वैज्ञानिक यह भूल जाते हैं कि नासा का काम ब्रह्मांड खोजना है, आपके घर की रसोई के नुस्खे प्रमाणित करना नहीं।

‘फॉरवर्डेड मेनी टाइम्स’ यानी परम ज्ञान की अटूट गारंटी

व्हाट्सएप का एक नया और अटूट नियम है – जो संदेश जितनी ज्यादा बार फॉरवर्ड होगा, वह उतना ही बड़ा ब्रह्मज्ञान बन जाता है। इस यूनिवर्सिटी में किसी परीक्षा या थीसिस की जरूरत नहीं होती। बस एक ‘फॉरवर्ड’ बटन दबाइए और आप रातों-रात न्यूक्लियर फिजिस्ट या आयुर्वेद के सबसे बड़े डॉक्टर बन जाते हैं। बिना किसी जांच-परख के “इसे १५ लोगों को भेजें, शाम तक अच्छी खबर मिलेगी” वाले दावों पर यकीन करने वाली हमारी भोली जनता को सचमुच एक कड़क चाय और थोड़े से विवेक की सख्त जरूरत है। अगली बार ऐसा कोई दावा आए, तो कृपया पहले अपने दिमाग की बत्ती जलाएं, मोबाइल की टॉर्च नहीं!

कागा जी