नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका आपके पसंदीदा गॉसिप और एंटरटेनमेंट ठिकाने ‘काक-वाणी’ पर। आज हम बात करेंगे उस जज्बे की, जो हमारे दिलों में तो धड़कता ही है, लेकिन जब वो 70 MM के रुपहले पर्दे पर उतरता है, तो पूरे थिएटर में सीटियां, तालियां और रोंगटे खड़े होने का दौर शुरू हो जाता है। जी हां, हम बात कर रहे हैं ‘आजादी’ की! पिछले 80 सालों में हमारे देश ने कई ऐतिहासिक मोड़ देखे हैं, और इस पूरे सफर में बॉलीवुड हमारा सबसे बड़ा हमसफर रहा है। हाल ही में विऑन न्यूज की एक रिपोर्ट ने भी इसी बात पर मुहर लगाई है कि कैसे सिनेमा ने हमें आजादी के अनगिनत रंग दिखाए हैं। तो आइए, इस फिल्मी सफर पर एक उड़ती नजर डालते हैं!
मनोज कुमार से ‘उरी’ तक: देशभक्ति का बदलता मिजाज
जब भी देशभक्ति फिल्मों की बात आती है, तो सबसे पहला चेहरा जो दिमाग में आता है, वो है मनोज कुमार यानी हमारे प्यारे ‘भारत कुमार’। ‘पूरब और पश्चिम’ से लेकर ‘उपकार’ तक, उन्होंने हमें सिखाया कि देशप्रेम क्या होता है। लेकिन समय बदला और बॉलीवुड ने देशभक्ति को एक नया और मॉडर्न चश्मा पहनाया। आमिर खान की ‘लगान’ ने क्रिकेट के मैदान पर अंग्रेजों के छक्के छुड़ाए, तो वहीं ‘रंग दे बसंती’ ने आज के कॉलेज जाने वाले युवाओं के भीतर सोए हुए भगत सिंह और चंद्रशेखर आजाद को जगा दिया। और हां, हम ‘उरी: द सर्जिकल स्ट्राइक’ के उस आइकॉनिक डायलॉग को कैसे भूल सकते हैं – “How’s the Josh? High, Sir!” जिसने देश के हर कोने में देशभक्ति का नया जोश भर दिया।
जब सिर्फ जंग नहीं, जज्बात बन गए आजादी की आवाज
बॉलीवुड ने हमें यह भी सिखाया कि आजादी सिर्फ सरहद पर जंग लड़ने का नाम नहीं है। ‘राजी’ में आलिया भट्ट की जांबाजी हो या ‘शेरशाह’ में सिद्धार्थ मल्होत्रा का कैप्टन विक्रम बत्रा बनकर ‘दिल मांगे मोर’ कहना, इन फिल्मों ने हमें यह महसूस कराया कि तिरंगे की आन-बान-शान के पीछे कितनी बड़ी कुर्बानियां होती हैं। वहीं, ‘चक दे! इंडिया’ जैसी स्पोर्ट्स ड्रामा ने खेल के मैदान पर तिरंगा लहराकर देशभक्ति की एक ऐसी नई और खूबसूरत परिभाषा लिखी, जिसने हर भारतीय की आंखों में गर्व के आंसू ला दिए।
काक-वाणी का आखिरी पंच
तो दोस्तों, चाहे वो बॉर्डर पर सनी देओल का चिल्लाना हो या ‘स्वदेश’ में शाहरुख खान का अपनी मिट्टी की खुशबू महसूस कर वापस लौटना, बॉलीवुड ने हर दौर में हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखा है। 80 साल का यह सफर सिर्फ फिल्मों का नहीं, बल्कि हमारी आपकी उन भावनाओं का है जिसे सिनेमा ने अमर बना दिया। अगली बार जब आप कोई देशभक्ति फिल्म देखें, तो पॉपकॉर्न चबाते हुए याद रखिएगा कि यह सिर्फ मनोरंजन नहीं, हमारी आजादी का जश्न है! जुड़े रहिए काक-वाणी के साथ ऐसी ही मसालेदार खबरों के लिए!
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