दुनिया में जब भी हास्य और मनोरंजन का अकाल पड़ता है, हमारा प्यारा पड़ोसी देश पाकिस्तान तुरंत संकटमोचक बनकर सामने आ जाता है। हाल ही में अल-जज़ीरा की एक सुर्खी ने हमारे थके हुए चेहरों पर खिलखिलाती मुस्कान बिखेर दी है। खबर आई है कि पाकिस्तान के वजीर-ए-आजम शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते (Indus Water Treaty) को लेकर भारत को बड़ी ही गंभीर ‘रेड लाइन’ यानी लक्ष्मण रेखा लांघने की चेतावनी दी है। जी हां, वही ‘रेड लाइन’, जिसे सुनकर खुद लाल रंग भी शरमा जाए और अपनी साख बचाने के लिए कोई दूसरा रंग ढूंढने लगे।
आटे की लाइन से लेकर ‘रेड लाइन’ तक का सफर
पाकिस्तान में आजकल लाइनों का बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। वहां की आवाम सुबह से शाम तक आटे की बोरी और मुफ्त के राशन के लिए मीलों लंबी लाइनों में संघर्ष कर रही है। शायद इसी ‘लाइन’ संस्कृति से प्रेरित होकर शहबाज शरीफ साहब को अचानक यह क्रांतिकारी ख्याल आया कि क्यों न भारत के लिए भी एक नई लाइन खींच दी जाए—वह भी चटख लाल रंग की। जब जेब में फूटी कौड़ी न बची हो, विदेशी मुद्रा भंडार सूख चुका हो और मुल्क कर्ज के दलदल में गले तक धंसा हो, तब ऐसी कड़क अंतरराष्ट्रीय चेतावनी देने के लिए जिस फौलादी जिगर की जरूरत होती है, वह सिर्फ पाकिस्तानी हुक्मरानों के पास ही मिल सकता है।
कटोरा और चेतावनी की अद्भुत जुगलबंदी
यह दुनिया का पहला ऐसा अनोखा और अलबेला देश है जो एक हाथ में आईएमएफ (IMF) के सामने भीख का कटोरा थामे रहता है और दूसरे हाथ से परमाणु शक्ति संपन्न पड़ोसी को आंखें दिखाकर ‘लाल रेखा’ की धमकियां देता है। शहबाज शरीफ जी का दावा है कि भारत पानी के समझौते में अपनी मर्जी से कोई संशोधन न करे। अब कोई इन समझदार वजीर-ए-आजम को समझाए कि यदि भारत ने वाकई अपनी नदियों के पानी का रुख थोड़ा सा भी मोड़ दिया, तो पाकिस्तान में बची-कुची बिजली भी गुल हो जाएगी। फिर उन्हें अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर अपनी खुद की खींची हुई ‘रेड लाइन’ ढूंढनी पड़ेगी।
काक-वाणी की मुफ्त सलाह
भारत ने तो केवल इतना ही कहा था कि 60 साल पुराने सिंधु जल समझौते की समीक्षा होनी चाहिए, क्योंकि सीमा पार से आने वाले आतंकवाद और भारत का बहता पानी, दोनों एक साथ नहीं चल सकते। लेकिन पाकिस्तान को लगता है कि ‘रेड लाइन’ की गीदड़भभकी देने से भारत डर जाएगा। ‘काक-वाणी’ का पाकिस्तानी हुकूमत को सीधा और मुफ्त मशविरा है: जनाब, इस लाल स्केच पेन को ज्यादा मत घिसिए, इसकी स्याही खत्म हो जाएगी। बेहतर होगा कि इस बची-कुची लाल स्याही को बचाकर रखें और आईएमएफ के लोन एग्रीमेंट पर दस्तखत करने के काम लाएं। पानी तो अपनी रफ्तार से बहता ही रहेगा, लेकिन अगर कटोरा खाली रह गया, तो ‘रेड लाइन’ भी बह जाएगी और हाथ में सिर्फ सूखा कटोरा रह जाएगा।
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