एक अनोखा और गहरा रिश्ता
सुंदरवन के घने जंगलों में गजराज नाम का एक विशालकाय और अत्यंत दयालु हाथी रहता था। वह अपनी ताकत और समझदारी के लिए पूरे जंगल में प्रसिद्ध था। लेकिन नियति का खेल ऐसा बदला कि बढ़ती उम्र के साथ गजराज की आंखों की रोशनी पूरी तरह चली गई। अब वह असहाय हो चुका था और भोजन की तलाश में भटकने लगा था। जंगल के अन्य स्वार्थी जानवरों ने उसका साथ छोड़ दिया। ऐसे कठिन समय में, चिंकी नाम की एक नन्हीं और चंचल गिलहरी गजराज के जीवन में आई।
चिंकी ने जब विशालकाय गजराज को बेबस देखा, तो उसका दिल पिघल गया। उसने गजराज की आंखें बनने का फैसला किया। वह रोज गजराज के माथे पर बैठ जाती और प्यार से उसे रास्ता दिखाती। चिंकी गजराज के कानों में धीरे से कहती, “दादा, आगे बढ़ो, रास्ता साफ है” या “रुक जाओ, आगे गहरी खाई है।” गजराज उसे अपनी पीठ पर बिठाकर जंगल की सैर कराता और उसे मीठे-मीठे फल तोड़कर देता। दोनों की यह अनोखी और भावुक कर देने वाली दोस्ती पूरे सुंदरवन में मिसाल बन गई थी।
जब जंगल में आई तबाही
एक दिन दोपहर के समय भीषण गर्मी के कारण जंगल में अचानक भयंकर आग लग गई। हवा के तेज झोंकों के साथ आग की लपटें तेजी से फैलने लगीं। चारों तरफ हाहाकार मच गया। सभी पशु-पक्षी अपनी जान बचाकर भागने लगे। गजराज देख नहीं सकता था, इसलिए वह घबराहट में इधर-उधर भागने लगा। आग का धुआं उसके फेफड़ों में भरने लगा था और वह एक जगह ठिठक कर खड़ा हो गया। उसे अपनी मौत सामने नजर आ रही थी।
चिंकी चाहती तो फुर्ती से पेड़ों की टहनियों पर कूदकर अपनी जान आसानी से बचा सकती थी। लेकिन उसने अपने विशालकाय मित्र को इस भयानक मौत के मुंह में अकेले छोड़ने के बारे में सोचा तक नहीं। चिंकी ने गजराज के कान के पास जाकर चिल्लाकर कहा, “गजराज दादा! हिम्मत मत हारो, मैं तुम्हारे साथ हूं। बस मेरी आवाज का पीछा करो और दौड़ो!”
सच्ची मित्रता का इम्तिहान और जीत
दमघोंटू धुएं के कारण चिंकी का बुरा हाल था, फिर भी वह लगातार चिल्लाती रही और रास्ता बताती रही। गजराज ने अपनी नन्हीं दोस्त की आवाज पर पूरा भरोसा किया। वह बिना डरे चिंकी के बताए निर्देशानुसार आगे बढ़ने लगा। अचानक रास्ते में एक जलती हुई टहनी चिंकी के ऊपर गिरने वाली थी, लेकिन गजराज ने अपनी सूंड से उस जलती लकड़ी को दूर फेंक दिया, जिससे उसकी सूंड झुलस गई।
आखिरकार, चिंकी के अटूट मार्गदर्शन और गजराज के अटूट विश्वास की बदौलत वे दोनों सुरक्षित नदी के किनारे पहुंच गए। आग के खतरे से बाहर आते ही चिंकी बेहोश होकर गजराज की पीठ से नीचे गिर पड़ी। गजराज ने अत्यंत व्याकुल होकर अपनी सूंड से नदी का शीतल जल चिंकी के ऊपर छिड़का। कुछ क्षणों बाद जब चिंकी ने अपनी आंखें खोलीं, तो गजराज की अंधी आंखों से खुशी के आंसू बह रहे थे। उसने चिंकी को धीरे से अपनी सूंड में समेट लिया। आज एक नन्हीं सी गिलहरी ने अपनी जान जोखिम में डालकर एक विशालकाय हाथी के प्राण बचाए थे।
कहानी से सीख
इस बेहद भावुक पंचतंत्र की नैतिक कहानी से हमें यह अमूल्य सीख मिलती है कि सच्ची मित्रता शारीरिक आकार, बल या रूप-रंग पर निर्भर नहीं करती। जो संकट के समय अपने स्वार्थ को भूलकर मित्र का साथ निभाए, वही सच्चा मित्र है। आपसी विश्वास और निस्वार्थ प्रेम के बल पर दुनिया की हर बड़ी से बड़ी विपत्ति को जीता जा सकता है।