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अब तेरा क्या होगा, लीला? लीला की छोटी बहन पार्थिवी

Title: अब तेरा क्या होगा, लीला?

लीला की छोटी बहन पार्थिवी बहुत शरारती थी। वह हमेशा अपना समय यूँ ही खर्च करती थी। एक दिन वह ढेर सारी खाने की वस्तुओं से अपनी जेब भरने के लिए एक छोटी दुकान में चली गई। वह शैम्पू, साबुन और कुछ अन्य चीजों को चोरी करना चाहती थी। जब वह यह सब कर रही थी, खिड़की से एक आवाज आई – “चोर! चोर! चोर!”

लीला बहुत डर गई थी। उसने सोचा कि वह कैसे इस समस्या से बाहर निकल सकती है। वह जनता थी कि अगर उसे पकड़ लिया गया तो उसका परिवार बहुत बड़ी मुसीबत में पड़ जाएगा। इसलिए वह खिड़की से लिपटकर वहां से बाहर निकलने की कोशिश करने लगी। लेकिन लीला होशियार नहीं थी, उसने जल्दी खिड़की से बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन उसको पकड़ लिया गया।

दुकानदार ने उसके हाथों को बाँध लिया था। उसने सोचा कि उसकी किस्मत में अच्छा नहीं होने वाला है। वह होने वाला सजा के बारे में बहुत डर रही थी। उसकी बहन पार्थिवी उसे डरा रही थी कि निश्चित ही उसके साथ कुछ बुरा होगा।

लेकिन दुकानदार पार्थिवी के साथ बहुत सहमत थे। वह सोचता था कि उसे नहीं पकड़ा गया था क्योंकि उसकी बहन वहां पर नहीं थी। उसने लीला को जेल में डालने के बदले पार्थिवी को अपने दुकान में कुछ दिन के लिए काम करने के लिए बोला।

पार्थिवी ने ध्यान रखा कि वह बहुत सी चीजें सीखेगी। वह धोखे और छल-कपट के बारे में सीखेगी जो उसे अब तक पता नहीं थे। इस रास्ते में उसके लकीर बदलने वाली थी।

अगले कुछ दिनों में, पार्थिवी अपने काम के बारे में बहुत कुछ सीखी। वह बहुत अच्छी तरह से समझी कि जीतना बड़ा बिल होगा, वह उतना ही बड़ा धोखा देने का मौका भी बढ़ा देगा। वह धोखाधड़ी करने कला में पहले से अधिक अनुभवी हो गई थी।

उसने अपनी फ्रेंड लीला का सहारा लेना कभी भी नहीं भूली थी। उसने सोचा कि अगर वह अब लीला को सही सलाह देगी तो उसे उसके वर्तमान समस्या से बरामद करने में मदद मिल सकती है।

पार्थिवी ने लीला के पास जाकर उसे अपने समस्या के बारे में बताया। वह बहुत परेशान थी। लेकिन उसने इस बात को समझा कि अब इस समस्या से बाहर निकलने के लिए उसे संघर्ष करना होगा।

उसने अपने घरवालों से बात की और उनसे उसका समर्थन भी मिला। लीला अब समस्या का विश्लेषण करने के लिए तैयार थी। उसने ध्यान दिया कि उसकी बहन की गलती थी लेकिन उसे इससे सीखना भी बहुत जरूरी था।

लीला ने अपनी बहन की बजाय पार्थिवी से बातचीत की। उसने उसे मजबूत होने के लिए सलाह दी और उसे उसकी समस्या से निकालने के लिए बहुत सारी मदद भी की।

पार्थिवी ने उसे उसके समस्या का विश्लेषण करने में मदद की। उसने बताया कि उसे एक जॉब और एक पेंशन मिलने वाली है और इसके लिए उसे बहुत कुछ करना होगा।

लीला ने अपनी खुशी व्यक्त की। वह अब जीवन में मजबूत होने के लिए उत्सुक थी। उसने अपने के काम पर दी के लिए कोई सेवा नहीं छोड़ी और इसके बजाय वह एक संगठित कार्य के लिए काम करने लगी। वह उस संगठन में बहुत सफल हुई और आधार कार्ड बनाने के लिए अपने दोस्तों और परिवार के लोगों की मदद का उपयोग करते हुए 10-15 लोगों को गुमराह करने से बचाने में भी मदद की।

अंत में, लीला ने जीत पाई। वह अपनी समस्या से उबरने में सफल रही। उसने अपनी बहन और दुकानदार से माफी मांगी और एक नई शुरुआत की।

लीला ने सीखा कि जीवन में आने वाली समस्याओं से बचने का तरीका उन्हें अपना लेना होगा। उसने जाना कि धोखा देना अच्छा नहीं होता, लेकिन अगर कोई समस्या आती है तो उसे उसके हल के बारे में सोचना चाहिए। उसने नई शुरुआत की। वह अब एक मासूम और नाचने वाली बच्ची नहीं थी। वह अब एक सफल और सामाजिक अधिकार बन गई थी।

कागा जी

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