अमरीका पर ‘देसी’ कब्ज़ा: कैपिटल हिल तक पहुँचने का ‘समोसा पैंतरा’

दुनिया की सबसे बड़ी महाशक्ति अमरीका को शायद यह मुगालता था कि वह केवल अपने संविधान और तकनीकों से संचालित होता है। लेकिन हमारे भारतीय भाइयों और बहनों ने इस भ्रम को बड़ी आत्मीयता से तोड़ना शुरू कर दिया है। गूगल और माइक्रोसॉफ्ट की कुर्सियों पर अपना तौलिया बिछाने के बाद, अब हमारे ‘देसी सूरमा’ वाशिंगटन के कैपिटल हिल पर नज़रें गड़ाए बैठे हैं। लेकिन रणनीति बहुत सीधी और पारंपरिक है – पहले गली-मोहल्ले का चुनाव जीतो, फिर व्हाइट हाउस पर कब्जा करो!

काउंटी बोर्ड से कैपिटल हिल तक: ‘जुगाड़’ का अमरीकीकरण

हालिया रिपोर्टों के मुताबिक, अमरीकी संसद में अपनी धाक जमाने के लिए भारतीय-अमेरिकी प्रत्याशियों ने ‘स्टेप-1’ यानी स्थानीय राजनीति को अपना शिकार बनाना शुरू कर दिया है। स्कूल बोर्ड, काउंटी काउंसिल और नगर पालिकाओं के चुनावों में अब ‘अंकल जी’ और ‘आंटी जी’ पूरे जोश के साथ उतर रहे हैं। जहाँ कभी अमरीकी उम्मीदवार सड़क की मरम्मत और लोकल टैक्स की नीरस बातें करते थे, वहाँ अब हमारे देसी प्रत्याशी वोटर को समोसे की खुशबू और पारिवारिक मूल्यों की घुट्टी पिला रहे हैं। आखिर दिल्ली या मुंबई की आरडब्ल्यूए (RWA) का चुनाव जीतने का तगड़ा अनुभव अमरीकी काउंटी में काम नहीं आएगा तो कहाँ आएगा?

‘समोसा कॉकस’ का सुपरपावर प्लान

अमरीकी राजनीति में भारतीय मूल के नेताओं के गुट को प्यार से ‘समोसा कॉकस’ कहा जाता है। लेकिन इस कॉकस की भूख सिर्फ समोसों तक


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कागा जी