Title: आखिर क्यों में निहार रहा था?
रमेश एक पतंग उड़ा रहा था, उसकी आखें खुशी से झिलमिला रही थीं। वह अपनी लड़कपन की खुशियों से भरी थी। रमेश काफी समय बाद फिर से पतंग उड़ा रहा था। वह अपने बचपन के यादों और खुशियों से भरा था।
रमेश के विद्यालय में एक महौल था, जहां उसके सभी साथियों ने एक दूसरे के साथ एक अच्छी दोस्ती की थी। उस समय, वह केवल एक साधारण लड़का नहीं था, बल्कि वह अपनी माँ का एकमात्र बेटा था जिसके पास कुछ और नहीं था बस सिर्फ उसकी माँ के प्यार और भरोसे थे।
रमेश के पिता अपनी परिवार को छोड़ कर चले गए थे जब वह छोटा था। उसकी माँ उसको अस्पताल भर्ती कराने में उलझ गई थी और उसने एक नौकरी ढूँढ़ने के लिए सकारात्मक रहने की कोशिश की थी। उस समय, रमेश सभी इस नुकसान को सह नहीं करने के साथ-साथ अपनी माँ के लिए उन्हें मजबूत बनाने की कोशिश कर रहा था।
उसने संगठन किया जो कई तरीकों से उसकी माँ को आर्थिक रूप से सहायता पहुंचने के लिए उसको मदद करता था। उसने उन सभी भावनाओं, जो उसके मन में थीं, साकार करने के लिए उसकी माँ को एक सहायता हस्तांतरण समूह के साथ मिली।
रमेश ने समूह की स्थापना की और उसने डोनेशन की लोगों से मदद मांगने के लिए टैग लागू किया था। उसने टैग के जवाब में बहुत कुछ प्राप्त किया था जिसकी मदद से उसने अपनी माँ की आर्थिक स्थिति सुधारी थी।
उस समय से अब तक, रमेश ने एक अच्छे व्यक्तिगत जीवन को अपने आप के लिए स्थापित किया था। उसने अपने माँ का सहारा बनाया। उसकी माँ की आर्थिक स्थिति सुधर गई थी और वह आत्मनिर्भर हो गई थी।
अपने जीवन के इस उतार-चढ़ाव, रमेश ने एक खुशहाल जीवन जिया था। वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए सक्रिय रहा और उसने एक खुशहाल व्यक्तित्व के प्रति ध्यान केंद्रित किया था।
एक दिन, उसको एक लहर से गिरफ्तार हो गया। उसे लगा कि उसने इतना समय क्यों बर्बाद किया जब उसने वास्तव में जीने का इरादा किया नहीं था। उसने अपनी आंखें खोलीं तब देखा उसने अपनी माँ का आँखों में आँसू देखा।
वह जानता था कि उसके परिवार के लिए उसने बहुत परेशानियों का सामना किया था, लेकिन वह सब साफ नहीं देख कर अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने लगा था। अपनी सफलता के समय, उसने कभी सोचा नहीं था कि उसका इस प्रकार खत्म होगा और उसे फिर से अपने परिवार के संचार का पता नहीं होगा।
‘आखिर क्यों में निहार रहा हो?’ उसकी माँ ने पूछा। उसने एक देर अपनी माँ की पूरी तरह समझी और उससे अपने जीवन के पुराने सपनों और आकांक्षाओं के बारे में बताया।
‘मुझे मानना है कि व्यक्तित्व निर्माण का एक अंग घमंड नहीं होना चाहिए। हमें हमेशा खुश रहना चाहिए और अपने सपनों को पाने के लिए महनत करना चाहिए।’ उसने अपनी माँ से सलाह मांगते हुए कहा।
उसके बचपन के सबसे अच्छे दोस्त ने दुनिया में चल रहे सब सुख-दुःख सहने के लिए बदलाव के लिए अमेरिका को छोड़ दिया। वह उस पर बहुत ही गहरा प्रभाव डालता था। उस बित्तिया को याद करते हुए, रमेश ने अपने परिवार के साथ एक फिर से शुरुआत की और उसने एक फिर से अपने सपनों को पूरा करने का फैसला किया।