Title: ईमानदारी का मूल्य
एक समय की बात है, एक गाव में रहने वाले रामु नाम का एक लड़का था। वह मध्यम वर्गीय परिवार से था। रामु नाम के पास एक दुकान थी, जिसमें वह धातु से बनी सामग्री बेचता था। रामु नाम अपने दुकान में बहुत मेहनत करता था और यह बात उसके ग्राहकों ने कभी नहीं बुरी तरह से फायदे का उठाया।
एक दिन रामु नाम अपनी दुकान में अपनी ईमानदारी का सबूत दिखाने के लिए एक असली सोने की लड़ी और एक नकली सोने की लड़ी रखा। उस दिन कुछ समय बाद एक युवक रामु नाम की दुकान पर आया। वह रामु नाम से पूछता है कि यह सोने की लड़ी असली है या नकली और उसका मुल्य क्या है।
रामु ने युवक को समझाया कि यह सोने की लड़ी नकली है और उसकी कीमत साथ में धन्यवाद देते हुए बता दी। युवक को नई सोने की लड़ी चाहिए थी लेकिन वह रामु नाम की दुकान में सोने की लड़ी नहीं ढूंढ पा रहा था।
युवक ने फिर रामु नाम से पूछा कि क्या उसे कहीं और सोने की लड़ी उपलब्ध है। रामु ने युवक से वादा किया कि वह उसे अगले दिन सबसे अच्छी सोने की लड़ी लेकर आएगा।
अगले दिन, युवक फिर दुकान पर आया और रामु नाम ने उसे एक साफ सोने की लड़ी दी। युवक धन्यवाद देकर लौट गया और दुकान से सोने की लड़ी लेकर नगर घूमने लगा।
कुछ समय बाद, युवक वापस आया। उसके हाथ सोने की लड़ी में कुछ पट्टियों का खड़ा हुआ था। उसने रामु नाम को बताया कि वह सोने की लड़ी असली नहीं है, बल्कि नकली है। रामु नाम चकित था। उसने यह सोचा कि वह नकली सोने की लड़ी युवक को कैसे दे गया।
अगले दिन, युवक फिर आता है। रामु नाम ने उसे सोने की लड़ी वापस दी और कहा कि वह आगे से असली सोने की लड़ी खरीदने के लिए सतर्क रहें। उसने अपने त्याग और ईमानदारी को साबित किया और इससे अधिक उसे कुछ नहीं चाहिए था।
इससे यह रामु नाम के ग्राहकों के मन में उसकी ईमानदारी की कीमत को बढ़ा देने लगी और दुकान में समय बीतने के साथ-साथ उसका नाम भी और आम लोगों के इनामों में आने लगा।
जीवन में ईमानदारी का जीता जागता उदाहरण होना चाहिए और रामु नाम ने इस उदाहरण को सफलता का रास्ता बनाया। उसने सिर्फ और सिर्फ सच और असलीत की ईमानदारी का मूल्य समझा था और इससे उसे अधिक धन, सम्मान और खुशी मिली।
इसलिए, हमें भी समय-समय पर हमारे काम वचन से नहीं बल्कि आपूर्ति के विकल्पों पर निर्णय लेने से पहले समझना चाहिए कि ईमानदारी का मूल्य क्या है।