‘उत्तर-सत्य’ का नया मसीहा: कांग्रेस का अविश्वास कुटीर उद्योग

अरे वाह! ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ ने आखिरकार वह महा-सत्य ढूंढ ही निकाला जिसे देश का आम नागरिक सालों से अपने व्हाट्सएप ग्रुपों में टटोल रहा था। हेडलाइन चीख-चीख कर कह रही है—कांग्रेस ‘उत्तर-सत्य’ यानी Post-Truth की राजनीति कर रही है, देश में अविश्वास का निर्माण कर रही है और लोकतंत्र की जड़ों को कुदाल से खोद रही है। काक-वाणी की मुंडेर से हम इस अद्भुत ज्ञानोदय के लिए सम्पादकीय महोदय का कोटि-कोटि धन्यवाद करते हैं!

सत्य की समय-पूर्व सेवानिवृत्ति और कांग्रेस का उपक्रम

अब आम जनता पूछेगी कि यह ‘उत्तर-सत्य’ किस चिड़िया का नाम है? सरल भाषा में समझिए—जब ‘सत्य’ भारतीय राजनीति की कड़कती धूप में थक-हारकर पेंशन मांगने लगता है, तब जो खेल बचता है उसे उत्तर-सत्य कहते हैं। वैसे तो देश में सत्य महाराज राजा हरिश्चंद्र के साथ ही परलोक सिधार गए थे, लेकिन आरोप यह है कि कांग्रेस ने अब अविश्वास और भ्रम का बाकायदा एक ‘स्वदेशी कुटीर उद्योग’ खोल लिया है। मेक इन इंडिया का इससे जीवंत उदाहरण और क्या हो सकता है?

सोचिए, कितनी मेहनत लगती होगी उस पार्टी को अविश्वास ‘मैन्युफैक्चर’ करने में, जिसकी अपनी राजनीतिक साख का शेयर बाज़ार में भाव लगातार पैंदे से टकरा रहा है! जब सत्ता पक्ष रोज सुबह विकास के नए सपनों की बुलेट ट्रेन चलाता है, तो विपक्ष को भी तो कम से कम ‘संदेह की रिफाइनरी’ चालू रखनी पड़ेगी ना? आखिर लोकतंत्र में संतुलन नाम की भी तो कोई चीज़ होती है!

लोकतंत्र का ढांचा और कौवों का कौतूहल

टाइम्स ऑफ इंडिया को चिंता है कि इससे ‘लोकतंत्र कमज़ोर’ हो रहा है। अरे साहब! हमारा लोकतंत्र क्या शक्कर की बोरी है जो ज़रा सी अविश्वास की बारिश में गल जाएगा? समस्या यह नहीं है कि कांग्रेस भ्रम फैला रही है; समस्या यह है कि वह इसमें भी अनाड़ी साबित हो रही है। जब वे अविश्वास का गुब्बारा फुलाते हैं, तो उसमें हवा कम और खुद की फजीहत का शोर ज़्यादा होता है। न जनता को भरोसा होता है, न खुद बयान देने वाले नेता को!

‘काक-वाणी’ का मानना है कि अगर उत्तर-सत्य पर पेटेंट होता, तो आज भारत के तमाम राजनीतिक दल एक-दूसरे को रॉयल्टी का चेक काट रहे होते। कांग्रेस की दिक्कत बस इतनी है कि वह इस खेल में थोड़ी देर से आई और स्क्रिप्ट याद किए बिना मंच पर कूद पड़ी। खैर, जब तक राजनीति में सच को वनवास रहेगा, तब तक हम जैसे कौवों को कांव-कांव करने के लिए ऐसा ही स्वादिष्ट दाना मिलता रहेगा!


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी