Title: उम्र कैसे बदल गई
अमित एक चीख से उठा। उसने लगभग एक दशक से अपनी गंभीरता के साथ यह अनुभव किया था कि उसकी उम्र कुछ अलग हो रही है।
“मुझे कुछ नहीं,” उसने सोचा। “मैं सिर्फ 32 हूँ। मेरी उम्र बस यही है।”
लेकिन उसे लगा कि उसकी उम्र अलग हो रही है। वह अलग दिखती थी, अलग महसूस होती थी। उसे अपनी उम्र से सहमत नहीं था।
उसने अभी तक अपने अंदर की चीजों को नहीं समझा था। उसे लगता था कि दो आदमी जो एक ही उम्र में होते हैं, उनकी उम्र एक जैसी होती है। लेकिन वे दोनों अलग दिखते और अलग महसूस होते थे।
अमित को वे अलगताएं कुछ उलझन में डाल रही थीं। उसे लगता था कि उसकी ज़िन्दगी में कुछ फिसल गया है। वह नहीं जानता था कि उसे अपनी ज़िन्दगी में क्या असमंजस हो गया है।
उसकी उम्र से उसके मन में उन सभी सालों की यादें काफी अधिक थीं, जिसे वह भूलने का प्रयास कर रहा था। उसे अब याद आता था कि वह किसी जगह खोया हुआ था। उसे लगता था कि उसे अपने जीवन के ऊपर अधिक नियंत्रण नहीं होता है।
एक दिन, अमित के दोस्त उसे एक संगीत शो में ले गए। वह लोग वहाँ पहुँचने के बाद उदास सा महसूस कर रहे थे। अमित के दोस्त ने उसे देखा और पूछा, “तुम अपने उम्र से अलग क्यों लगते हो?”
अमित ने गहराई से सांस ली और फिर अपने दोस्त को कहा, “मुझे नहीं पता। मैं सिर्फ इस वक्त के बारे में चिंतित हूँ।”
उसके दोस्त ने उसे एक लम्हा सोचने के लिए छोड़ दिया। अमित खुश होने की जगह, और उसने तत्काल अपने जीवन के बारे में सोचना शुरू किया।
उन्होंने याद किया कि उनके माता-पिता ने कभी उनके साथ अत्यधिक समय नहीं बिताया था। उन्होंने याद किया कि उन्हें स्कूल और कॉलेज में उत्तम निष्क्रियता थी लेकिन उनके बारे में कोई स्पष्ट दिशा नहीं थी।
अमित को पता चला कि उसे खुश रखने के लिए उसे अपने जीवन को अधिक नियंत्रित करना होगा। उसे अपने जीवन को ट्रैक करने की आवश्यकता थी। उसे अपने जीवन को निष्कर्षों के बिना नहीं जीना होगा।
अमित ने अपनी तलाश में जीवन के अलग-अलग पहलुओं को जानने की शुरुआत की। उसने अपने शहर के मंदिरों, पार्कों और मेलों की सैर की। उसने अपनी पुरानी रूढ़ियों पर नजर रखीं और नई रूढ़ियों को शुरू किया।
उसने बुक क्लब में शामिल होकर बहुत से ध्यानवर्धक किताबें बुक किए। वह अन्य लोगों के साथ संवाद करता और वे सभी अपने नए विचारों के बारे में बात करते थे। वह अपने दोस्तों और परिवार के साथ अधिक समय व्यतीत करता था और उन्हें अपने जीवन के नए क्षेत्रों के बारे में बताता था।
उसके जीवन के अनुभव ने उसे उसके संदर्भ के लिए एक नए दृष्टिकोण, एक नए संज्ञान का एक नया संज्ञान दिया। उसे अपने जीवन में नए पहलुओं की उपलब्धता का एहसास हुआ।
उसकी उम्र नहीं बदली थी। वह अभी भी 32 साल का ही था। लेकिन उसे आज अपनी ज़िन्दगी में अधिक नियंत्रित महसूस होता था। उसे उसके संदर्भ में अधिक उत्साहित होने लगा था।
उसका संज्ञान उसकी उम्र को बदलते नहीं देखता था बल्कि बेहतर बनाता था। उसे थोड़ा समय लगा लेकिन उसे उसकी ज़िन्दगी में अपने नियंत्रण पर अधिक नियंत्रण हस्तक्षेप से शुरू होना चाहिए था।
अमित अब अपनी उम्र के साथ काफी खुश रहता था। उसे अपने जीवन के अधिक नियंत्रण था। वह उसकी प्रत्येक पल का आनंद लेता था। उसने अपनी बीमारियों का सामना किया था लेकिन उसने कुछ नहीं हारा था।
अमित उन लोगों में से एक बन गया था जो उनके समय से अधिक महत्वपूर्ण समझते थे और जीवन के हर पहलू से उन्हें परिचित करते थे। उसे विश्वास हो गया था कि उसकी उम्र ही नहीं बल्कि जीवन इस वक्त उनके जीवन के हर पहलु का प्रतिनिधित्व करता था।
अमित के लिए अब केवल यह उलझन रह गई थी कि वह जीवन के अन्य नये स्तरों को कब जान पाएगा। इस का उत्तर उसे उसके जीवन के अनुभव होंगे। उसने इस विश्वास के साथ जीवन के नए उद्देश्यों की ओर बढ़ना शुरू किया।
अमित की उलझन हल हो गई थी कि वह अपनी उम्र के साथ कैसे चलता था। जीवन के हर पेड़ से उसे धोखे के दौर से रुबरु होने के लिए एक मौका मिला था। उसने अपनी नाकामी में दागें को फिलहाल भूला दिया था। उसने कभी नहीं सोचा था कि उसकी उम्र के साथ उसका जीवन बदल जाएगा।
— The End —