एक अनोखी दोस्ती
एक बार एक गांव में एक लड़का और एक लड़की रहते थे। वे स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। उन्होंने एक दूसरे को कभी फ्रेंड बनाने की कोशिश नहीं की थी क्योंकि लड़का थोड़ा कम बोलता था और लड़की बहुत बातें करती थी। हालांकि, एक दिन स्कूल से जाते समय वे एक दूसरे को एक कुत्ते को बेरहमी से मारते देखा। दोनों को बहुत दुख हुआ।
लड़का पूछा, “तुम ठीक हो, क्या मैं कुछ मदद कर सकता हूं?”
लड़की ने हाथ बढ़ा कर कहा, “हाँ, आप हमारी मदद कर रहे हैं। हमें उस आदमी को रोकना है।”
लड़की अधिक बोली तो लड़का कम बोलता था, यदि लड़की बहुत बातें कर लेती थी तो लड़का उसे सुनता रहता था।
लड़के और लड़की उस आदमी के पीछे भागने लगे और उसे रोका। उन्होंने कुत्ते के लिए एक बचाव की ओर काम किया। इस बाद, उन्होंने नयी दोस्ती की शुरुआत की।
दोस्ती चारों तरफ बढ़ती गई और एक दिन वे एक दूसरे को खुशी की खबर सुनाने आए। लड़का बड़ा घमंडी था तो लड़की बिना कुछ कहे उसे समझाने लगी कि अहंकार अच्छा नहीं होता। लड़का अब संभल गया था और उनकी दोस्ती और लम्बी हो गई थी।
एक दिन, लड़की बुरी तरह से बीमार हो गई। वह हॉस्पिटल में हो गई और अस्पताल में एक लम्बे समय के बाद वह मर गई। लड़का शोक में था और उसे एक लम्बे समय तक सबक सीखना पड़ा कि दोस्ती कपटी, संभल जाओ और दोस्तों को लम्बी उम्र तक संभाले करें।
कुछ समय बाद, लड़का मर गया और लड़की उसे शामिल होने गई। उन्होंने एक और अनमोल दोस्ती बनाई।
इस दोस्ती से हमें यह सीख मिलती है कि कभी भी किसी को अपनी मानसिकता के आधार पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही हमें यह भी सीख मिलती है कि अपने दोस्तों को धोखे नहीं देना चाहिए, उन्हें संभाला जाना चाहिए ताकि दोस्ती उम्र भर टिके।