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एक अनोखी दोस्ती जैसे हर कहानी की शुरुआत होती है

Title: एक अनोखी दोस्ती

जैसे हर कहानी की शुरुआत होती है ठीक वैसे ही मेरी कहानी की शुरुआत हुई थी, मेरा नाम है राजेश, मैं अपनी माँ के साथ अकेले रह्ता था क्योंकि मेरे पिता की सालों पहले मौत हो गयी थी। मेरी माँ फैशन डिजाइनर थी इसलिए वो अकेले ही बहुत बिजी थीं, मुझे उनका ख्याल रखना होता था तब कभी मैं उन्हें ऑफिस पर अपने साथ ले जाता था।

जब मैं ऑफिस में जाता तो आधे घंटे तक उनके साथ वहां बैठता like नाम की फ़ोटो की एक बहुत ही अच्छी लड़की को देखता। मैं उसको देखकर बैठा खो जाता और उसके सोचने लगता, मैं पागल होता था ऐसे सोचता कि क्या वो मुझसे बात करेगी और फिर जब ऑफिस से जाना होता तो मैं उसकी सामने से ठहरता, पर उससे कुछ नहीं बोल पाता था। दिन बीतते जा रहे थे और मैं उस लड़की को देखना जारी रखता हुआ चार महीने बीत गए, एक दिन उसने मुझे पूछा “हैँ, तुम इतने समय से मेरे सामने से गुजरते रहते हो तो क्यों बोल नहीं पाते?” मैं उसे विस्मित अवस्था में देखता रह गया और फिर कहता “मैं बोलने के लिए डरता हूं”।

तभी उसने मुझसे पूछा “जब तुम्हें बोलने में इतना डर लगता है तो अगली बार जब तुम्हें डर लगे तो इसका मतलब है कि तुम मुझे 100 रूपये देने वाले हो” तब मैं उससे समझाता हुआ कि मुझे कोई 100 रूपये नहीं चाहिए, मैं उससे सिर्फ दोस्ती करना चाहता हूं, तभी उसने मुझसे कहा “तो सिर्फ दोस्ती के लिए हम अपनी फिल्म देखने के लिए जाएंगे और मुझे तुम दूध से बना हुआ हारमोनिक्स खिलाओगे।”

वोइला! ऐसे ही शुरू हुई हमारी दोस्ती, हम एक दूसरे के पास सारे दर्द-दुख बताते थे, साथ ही जब हम एकदूसरे के सामने डरते थे तो पैसे वाली हमारी खास दोस्ती के न के बराबर बोलते थे। दोस्ती इतनी अनोखी थी कि हमें एकदूसरे को बताना पड़ता था कि जब कोई हमारे साथ होते हुए गलत करता है तो हम उसे छोड़कर भी पहले एक दूसरे को बताते थे।

एक दिन हमने एक फिल्म देखने जा रहे थे जिसमें हमारे पास ना तो टिकट थे और ना ही पैसे, हमने बिना टिकट के फिल्म देखने का प्लान बनाया था। हम फिल्म देखने के लिए बैठने वाले बाहर वाले सीटों पर गये और फिल्म की शुरुआत हो गयी। बस तभी किसी ने हमें पकड़ लिया और हम दोनों ही पकड़े गए। हम दोनों बेहोश हो गए थे जब हम इंटरोगेट के लिए जाये तब हम दोनों ने बता दिया कि हमारे पास ना ही पैसे हैं और ना ही टिकट, हमारी जेल यात्रा के बाद हमारे पास ना ही दोस्त रह गए थे ना ही दोस्ती।

ये मेरी कहानी है जो आप सभी से कुछ सीख रही होगी कि अपने दोस्त के लिए आपको कभी झूठ नहीं बोलना चाहिए। दोस्ती एक अनोखी रिश्ता होता है जो हमेशा आपको संभालता है। हमेशा अपने दोस्तों के साथ हमेशा सच और सच्चाई बोलें। अगर हम सख़्त होकर उन्हें सहारा नहीं देंगे तो फिर हम उन्हें वास्तविक दोस्त कैसे कहेंगे। हमेशा अपने दोस्तों के साथ चुस्त रहना चाहिए, उन्हें सपोर्ट करना चाहिए ताकि उन्हें हमेशा आपके सामने कुछ भी छुपाने की जरूरत नहीं हो।

कागा जी

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