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एक सलवार का किस्सा

Title: एक सलवार का किस्सा (The Tale of a Salwar)

एक सलवार हर किसी के पहनावे में होता है, परंतु उसकी सच्ची कहानी बहुत ही कम लोगों को पता होती है। यह कहानी है एक सलवार के जीवन की जिसे कई लोग सही मायनों में सिर्फ फैशन के एक तुकड़े समझते हैं।

सोनू ने माँ को अपनी प्रेमिका का परिचय किया था और अगले हफ्ते शादी के लिए घर लाने जा रहा था। माँ ने उसे अपनी साड़ी और जेवरात दिए थे परंतु सोनू चाहता था कि वह स्वयं अपनी अहमियत का एक तोहफा लाए।

उसने अपनी प्रेमिका को बताया कि वह एक सलवार लेना चाहता है जो आसमान चूमता हो। उसने शॉपिंग मॉल जाकर दुकान में एक लाल रंग का सलवार देखा जिसमें सफेद फुलकरी की थ्रेडिंग थी। वह नहीं जानता था कि वह सलवार में बहुत खुलकर हंस पाएगा, परंतु जैसे ही उसने उसे पहना शुरू किया उसे लगा कि वह बहुत अलग सी लग रही है।

उसने अपनी प्रेमिका की मदद से उसके पास खरीदने का फैसला किया और अगले हफ्ते सलवार के साथ साथ, सफेद फुलकरी की थ्रेडिंग वाली एक दुपट्टा भी ले आया। उससे पहन कर वह दिन भर मजे से घुमता रहा और सभी लोगों ने उसकी तारीफ की।

परंतु वह बस हफ्ते भरी खुशियों के बाद इसे अपनी गड़बड़ जीवनशैली के चलते चोटियां खा गया। यह करोरों लोगों की तरह थोड़े नहीं था जो उत्तम जीवन जीले थे, वह एक गरीब लड़का था जो एक से एक मुश्किल से निपट रहा था।

सोनू का परिवार उसके सपनों के आशियाने को तबाह करता रहा। वह नौकरी ढूंढता रहा और न केवल उनकी गाड़ियां चोरी होती रहीं बल्कि एक दिन उसके घर परिवार के सभी सदस्य निराश होकर बैठ गए क्योंकि ऐसा लग रहा था कि उनके सारे सपने मुरझाने वाले हैं।

एक दिन सोनू ने नौकरी पाने के लिए एक फैक्ट्री में काम करना फैसला किया। यह एक सफल जानलेवा फैसला साबित हुआ क्योंकि उसने लगातार मेहनत करके उस फैक्ट्री में कई तरह के खंड अधिकारियों के लिए एक जानता बन गया।

एक दिन जब उसने फैक्ट्री के मालिक को नुकसान पहुंचाया, उसको वहां से निकाल दिया गया। उस दिन से वह दुनिया की नजरों से नीचे गिरता चला गया। उसके सपने मुरझा से गए, उसका मुस्कुराना और ईमानदारी नहीं रही। उसने कई जगहों पर काम करने का प्रयास किया परंतु कोई विशेषता नहीं मिली।

कुछ समय बाद, उसे अपने घर के लिए इंग्लैंड से दस हजार रुपये की ठेकेदारी मिली। वह बचत करना शुरू कर दिया। उसने सोचा कि वह अपने सपनों को फिर से बचा सकता है। वह अपने घर के सभी सदस्यों के सपनों को भी पूरा करने के लिए ततपर था।

वह उसी सोमवार को अपने भाई और उसकी पत्नी को उन्हें खुश करने के लिए एक चुनी हुई खाने वाले स्थान पर ले गया जहां वह फैमिली की सदस्यों के सभी सपनों का पूर्णांक मानने का निर्णय ले गया था।

उस स्थान पर जाकर उसने एक जगह में और कुछ खरीद लिया था। कुछ ही मिनटों में उसे अपनी खरीदें के अंतिम चरण में कुछ अलग हुआ। उसको दिखता था कि कोई उसकी सलवार पर कुछ लिखने जा रहा है। वह चौंका।

उसके बिनाके कोई नहीं देख रहा था। जब वह देखने गया तो उसे पता चला कि सलवार पर लिखा गया था – ‘अपने सपनों का पूर्णांक मानने के लिए, गड़बड़ जीवन और कई उपलब्धियों के चलते भी, मुझे दूसरे महत्वपूर्ण विषयों के बजाय सलवार भारतीय कपड़ों के वेबसाइट से खरीदने में खुशी हो रही है। मेरा भारत महान।’

यह संदेश उसे उसके पहले सलवार की याद दिलाता हुआ बताता था कि उसकी पहचान सलवार से शुरू हुई थी और उसका एकमात्र सलवार उसे उसकी ज़िन्दगी को बदल दिया था।

उसका सलवार उसे उसके जीवन की सच्ची कहानी याद दिलाता था और उसे याद दिलाता था कि कभी भी जिंदगी में अच्छी महत्वपूर्ण चीजों के लिए तलाशना शामिल नहीं होना चाहिए। एक सलवार के पीछे वास्तव में गहरी ज़िन्दगी की कहानी छिपी होती है।

कागा जी

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