एक सुंदर संध्या | A Beautiful Evening
एक सुंदर संध्या थी। धरा ने खुशी से झूम उठी थी, सूरज अपना दिन का पुर्जा जल्द से जल्द समाप्त कर रहा था। छोटी सी गली में रहने वाली लता इस सुंदर संध्या का मजा लेने के लिए तैयार थी।
लता अपनी सबसे अच्छी दोस्त सुमन के साथ गली के कोने में खड़ी थी। सुमन ने लता से कहा, “देखो, सूरज समाप्त हो गया है।”
लता को भी पता था कि सूरज अब जल्दी से विदा हो जाएगा और रात का हक अब आसमान का होगा। इसलिए अब वह संध्या का मजा लेने के लिए उठी।
लता ने कहा, “चलो हम आस-पास की चीजों को देखने जाते हैं।”
वे गली के सभी चोराहे तक भ्रमण करने लगे। वहाँ वे बच्चों को खेलते हुए देखीं, लोगों से बातें किया, घरों में लोगों को देखा और बहुत कुछ देखा।
लता ने सुमन से कहा, “आओ, हम उस पुस्तकालय में चलते हैं जो हमेशा इतना शांत होता है।”
लता और सुमन पुस्तकालय में पहुंच गए जहाँ भावुक गीत की धुंध हो रही थी। लता और सुमन जब दरवाजे से अंदर गए तो उन्हें अचानक से शांति की एक अनोखी खुशबू महसूस हुई।
पुस्तकालय सबसे अलग लगता था क्योंकि वहाँ कुछ फूलों की खुशबू थी जो सबको खुश कर देती थी। सभी लोग वहीं बैठे थे, इसलिए पुस्तकालय में एकदम शांति सी थी, जो लता को बहुत पसंद थी। वहाँ लता और सुमन ने कुछ अच्छी पुस्तकें चुन लीं और बैठकर पढ़ने लगीं।
लता के मन में बहुत सी सोचें थीं। वह सोच रही थी कि दुनिया में इतने छोटे-छोटे मोमबत्तियों के समूह बन कर अमिट किरणों के समान प्रकाश फैलाते हैं।
मुंबईवाली इस सुंदर संध्या से बहुत खुश थी क्योंकि इस शांत वातावरण में वह कुछ समय के लिए विश्राम कर सकती थी। उसका सिर भर गया था और उसकी मनोदशा बदल गई थी।
वे पुस्तक खोल कर पढ़ने लगीं। उन्हें पढ़ते हुए शांति महसूस हो रही थी। समय के साथ, संध्या अंधेरे में ढल गई थी। लता और सुमन उठे और पुस्तकालय से निकल गए।
कोई भी उन्हें जल्द से जल्द अपने घर नहीं पाना चाहता था, लेकिन वह दोनों खुश रहीं क्योंकि वे अपनी सुंदर संध्या का मजा लेने के लिए निकल गए थे।
An Evening Worth Remembering | एक सुंदर संध्या