कश्मीर की समस्याओं का ‘रील्स’ समाधान: जब जेन-जी सिखाएगा आज़ादी का ‘एस्थेटिक’ तरीका!

वाह! धन्य हैं वे अंतरराष्ट्रीय बुद्धिजीवी जो वॉशिंगटन और दिल्ली के वातानुकूलित कमरों में बैठकर दुनिया की सबसे जटिल भू-राजनीतिक समस्याओं का समाधान ‘इंस्टाग्राम रील्स’ और ‘टिकटॉक’ में ढूंढ लेते हैं। हाल ही में ‘द डिप्लोमैट’ नामक परम ज्ञानी पत्रिका ने एक अत्यंत क्रांतिकारी लेख प्रकाशित किया है, जिसका शीर्षक है- “क्या कश्मीर भारत के जेन-जी (Gen Z) आंदोलन से सीख सकता है?” इस शीर्षक को पढ़ते ही हमारी आंखों से ज्ञान के अश्रु बहने लगे। हमें एहसास हुआ कि अब तक जो काम भारतीय सेना, कूटनीतिज्ञ और सरकारें मिलकर नहीं कर पाईं, वह काम अब ‘ट्रेंडिंग ऑडियो’ पर रील बनाने वाले हमारे महान जेन-जी युवा चुटकियों में कर देंगे।

लाल चौक पर रिंग लाइट और ‘नो कैप’ क्रांति

जरा इस परिदृश्य की कल्पना कीजिए! डल झील के किनारे कोई कश्मीरी प्रदर्शनकारी हाथ में पत्थर उठाने के बजाय ट्राइपॉड स्टैंड खड़ा कर रहा है। वह कैमरे के सामने पाउट बनाते हुए कह रहा है, “हे गाईस! आज हम आज़ादी मांगेंगे, लेकिन बिल्कुल ‘एस्थेटिक’ तरीके से। नो कैप, ब्रो, यह सिचुएशन बहुत क्रिंज है!” पीछे बैकग्राउंड में कोई पॉप म्यूजिक बज रहा होगा। हमारा लिबरल इकोसिस्टम शायद इसी अद्भुत दिन के इंतजार में अपनी छाती पीट रहा था। उनके अनुसार, कश्मीर के युवाओं को अब भारी-भरकम नारों और इतिहास को छोड़कर ट्विटर पर ‘कैंसल कल्चर’ और ‘माई चॉइस’ जैसे हैशटैग्स का उपयोग करना सीख लेना चाहिए।

‘टॉक्सिक रिलेशनशिप’ बनाम कफ्र्यू

इस महान लेख के रचनाकारों को शायद लगता है कि कश्मीर की सड़कों पर जो दशकों पुराना संघर्ष रहा है, वह असल में कोई राजनीतिक या सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि एक साधारण ‘सिचुएशनशिप’ है। वहां आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच की मुठभेड़ को ये महान चिंतक शायद ‘कम्युनिकेशन गैप’ मानते हैं, जिसका हल केवल ‘कपल थेरेपी’ से हो सकता है। इस नैरेटिव के अनुसार, कश्मीरियों को सेना की नाकेबंदी पर गुस्सा होने के बजाय उन पर एक तीखा ‘आई-ओपनर’ ट्विटर थ्रेड लिख देना चाहिए, जिससे सेना शर्म से पानी-पानी हो जाएगी। बंदूक छोड़ो और ‘स्ले’ (Slay) करो, यही तो नया मंत्र है!

इस परम ज्ञान के लिए ‘द डिप्लोमैट’ के संपादकों को तुरंत नोबेल शांति पुरस्कार के साथ-साथ एक मुफ्त स्टारबक्स कॉफी कूपन भी मिलना चाहिए। कश्मीर के युवाओं को अब तुरंत अपनी लड़ाई छोड़कर ‘इमो’ (Emo) लुक अपनाना चाहिए और लाल चौक पर खड़े होकर ‘डांस चैलेंज’ करना चाहिए। आखिर, क्रांति इंस्टाग्राम-फ्रेंडली होनी चाहिए, भले ही हकीकत में उसका वजूद शून्य हो!


संदर्भ मुख्य समाचार: यहाँ देखें

कागा जी