नमस्कार दोस्तों! स्वागत है आपका ‘काक-वाणी’ के इस चटपटे और बेहद खास बॉलीवुड गलियारे में। जब भी हम भारत-पाकिस्तान विभाजन की बात करते हैं, तो हमारे जहन में उजाड़, आंसू और बंटवारे का दर्द तैरने लगता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदी सिनेमा ने इस दर्द को पर्दे पर उतारने के लिए केवल दमदार संवादों का सहारा नहीं लिया, बल्कि कपड़ों यानी ‘फैशन’ को भी एक बड़ी आवाज बनाया है?
सिर्फ आंसू नहीं, लिबास भी बोलते हैं इतिहास
सिनेमा में इतिहास को जीवंत करने का काम कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स बखूबी करते हैं। जब विभाजन की त्रासदी को पर्दे पर दिखाना हो, तो कपड़ों का रंग और स्टाइल आधी कहानी खुद-ब-खुद बयां कर देता है। करण जौहर की फिल्म Kalank में आलिया भट्ट और माधुरी दीक्षित के पहनावे को ही देख लीजिए। फिल्म की शुरुआत में जहां चंदेरी सिल्क, खूबसूरत चिकनकारी और भारी कढ़ाई वाले अनारकली सूट दिखाए गए हैं, जो उस दौर की रईसी और अमन-चैन को दर्शाते हैं। वहीं, जैसे ही विभाजन का दंगा भड़कता है, वही चमकीले लिबास फीके, मैले और खून से सने दिखाई देते हैं।
‘कलंक’ से ‘गदर’ तक: सादगी में छुपा तबाही का मंजर
विभाजन के दौर का फैशन सिर्फ सजने-संवरने के बारे में नहीं था, बल्कि वह उस समय की सादगी और फिर अचानक मची तबाही का गवाह था। फिल्म Kalank में जहां एक तरफ भव्यता और फिर उसकी बर्बादी को कपड़ों से दिखाया गया, वहीं ‘गदर: एक प्रेम कथा’ में अमीषा पटेल का सादा सलवार-सूट और सिर पर ढका दुपट्टा एक संस्कारी लड़की की मनःस्थिति को दिखाता है। दंगे के वक्त धूल से सने कपड़े और बिखरे बाल बिना कुछ कहे ही विस्थापन का सारा दर्द बयां कर देते हैं।
फैशन जो बना भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया
बॉलीवुड के दिग्गज डिजाइनर्स का मानना है कि ऐतिहासिक किरदारों के कपड़े उनकी मानसिक स्थिति को दर्शाते हैं। ‘भाग मिल्खा भाग’ में सोनम कपूर का साधारण सूती सूट और ढीली चोटी उस दौर के पंजाब की सादगी को दिखाती है, जो विभाजन के बाद हमेशा के लिए बदल गई। हिंदी सिनेमा ने हमेशा कपड़ों के जरिए यह बखूबी दिखाया है कि कैसे एक हंसता-खेलता परिवार रातों-रात शरणार्थी बन गया और उनके कीमती लिबास फटे-पुराने कपड़ों में बदल गए।
तो दोस्तों, अगली बार जब आप विभाजन पर बनी कोई फिल्म देखें, तो केवल उसकी कहानी पर ही नहीं, बल्कि किरदारों के कपड़ों पर भी ध्यान दीजिएगा। वह महज फैशन नहीं, बल्कि इतिहास की सिसकती हुई आवाज है। बॉलीवुड की ऐसी ही अनोखी और दिलचस्प खबरों के लिए पढ़ते रहिए ‘काक-वाणी’!
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