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किसान के मोहन घरेलू पशु एक छोटे से द्वीप नाम

Title: किसान के मोहन घरेलू पशु

एक छोटे से द्वीप नाम सिम्बलू वहां पर कुछ किसान रहते थे। उनके गांव में पशु-प्राण बहुत अधिक थे। वे अपने घरेलू पशुओं की बहुत सी देखभाल करते थे। मोहन नाम का एक किसान भी उनमें से एक था। उसके पास दो भेड़िया, दो गाय, तीन बकरी, तीन सूअर और इक्का नाम का घोड़ा था। मोहन को उनसे वाकई बड़ी मुहब्बत थी।

एक दिन, जब उनके गांव में बड़ी बाढ़ आई तब इन पशु-प्राणों की बुरी तरह फँस गई। बाढ़ के निकट स्थानों पर उन्हें भोजन तो मिल रहा था लेकिन पीने का पानी नहीं था। मोहन का दिल दुखा देखकर एक घोड़े की शान्त नस्ल का पशु चौपट हो गया था। वह पानी के इंतजार में कुछ असामान्य कार्यों करने लगा।

पहले तो वह लोगों को सचेत करता रहा कि बंदर, जंगली सुअर, चींटियों व बहुत सारे जानवर पानी के लिए खोज रहे हैं। वह मोहन को बार-बार समझाता था कि उन्हें दाखिला दे दें जिससे वह निर्दोष पशु बाहर निकल सके। लेकिन मोहन उसे नहीं जानने देता था।

फिर जब अंततः सभी जानवर पानी के लिए खोजने निकल गए तो वह उन्हें नर्म भाषा में याद दिलाता रहा कि उन्हें दाखिला दीजिये। हालांकि कुछ लोग उसे धार्मिक पूजा का एक रूप समझते थे, उन्हें लगता था कि वह भगवान के रूप में उनके समक्ष आया है। जब लोगों और पशु-प्राणों के बीच बड़े क़ाबू का विस्तार हो गया तब मोहन ने बार-बार दाखिला मांगने वाले घोड़े को बाहर निकालने की कोशिश की। उसके बाद उसने दो भेड़ियों को भी कुछ सीखा।

वे प्रदर्शन बढ़ाने के लिए, दौड़ते हुए जानवरों के ठीक सामने कुछ नहीं करते थे। वे सिर्फ मांग रहे थे। लेकिन उस शानदार पशु की तरह वे अपने आपको साधारण जानवरों से अलग करते थे। उन्होंने उस घोड़े को देखकर कुछ नया सीखा था।

मोहन ने अंततः उसे घर से निकालने का फ़ैसला किया। लेकिन वह घोड़ा दिल से निकलना नहीं चाहता था। उसने दूसरे किसानों को भी मिलकर मोहन के यह फ़ैसले से असंतुष्टता दिखाई। वे चाहते थे कि उसे रहने दिया जाए।

लेकिन कुछ दिनों के बाद बाढ़ का आसरा खत्म हो गया था तब वह पहले वाले ठिकाने में वापस लौट गया। वह निर्दोष था जबकि सभी जानवर लोग अपनी भूख और प्यास के लिए आवश्यक संसाधन खोज रहे थे। लोग शुरू में उसे भगवान मानते थे, लेकिन अंततः उसे लोगों से प्रतिरोध मिलने लगा।

उसे अभिव्यक्त करने वाले पहले व्यक्ति के बाद सभी लोगों ने अखंड रूप से उसे एक आम जानवर माना। जैसे जैसे समय बीतता गया वैसे लोग वास्तविक घटनाओं से परिचित हुए और कुछ तरीकों से अपनी मानसिकता बदलती गई।

किसानों को यह मालूम चला कि वे अपनी समझदारी के साथ अपने प्रजनन व पालतू जानवरों के प्रति सही तरह से देखभाल कर सकते हैं और उन पर अपना पूर्ण विश्वास रख सकते हैं।

कागा जी

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