लोकतंत्र के पावन मंदिर में अब तर्कों और सिद्धांतों की जगह ‘नए भाषाई अलंकारों’ ने ले ली है। ‘द हिंदू’ ने तो सिर्फ एक इशारा किया है, असल में तो हमारे माननीय नेताओं ने भाषा का ऐसा ‘शुद्धिकरण’ किया है कि डिक्शनरी के प्रकाशक भी गहरे सदमे में हैं। कभी इस देश में राजनीति का मतलब कबीर, तुलसी और गांधी की भाषा हुआ करता था। लेकिन आज? आज अगर कोई नेता अपने भाषण में विपक्षी को पानी पी-पीकर न कोसे, या किसी मर्यादाहीन विशेषण से न नवाजे, तो जनता को लगता है कि बेचारे नेता जी का ‘सिस्टम’ खराब हो गया है या उनमें ‘दम’ ही नहीं बचा है।
गाली नहीं, यह तो ‘वैकल्पिक संवाद’ की नई कला है!
पुराने जमाने के मूर्ख बुद्धिजीवी कहा करते थे कि जब तर्क खत्म हो जाते हैं, तब इंसान अपशब्दों पर उतर आता है। लेकिन हमारे आधुनिक चाणक्य मानते हैं कि गाली तो दरअसल ‘वैकल्पिक संवाद’ (Alternative Dialogue) का एक क्रांतिकारी रूप है। जब आपके पास विकास के आंकड़े न हों, गरीबी और बेरोजगारी पर बोलने को कुछ न हो, तो बस मर्यादा की सीमा लांघ जाइए। मीडिया आपको तुरंत ‘आक्रामक’ और ‘तेज-तर्रार’ नेता का सर्टिफिकेट थमा देगा। प्राइम टाइम की बहसों में अब वही प्रवक्ता सबसे सफल माना जाता है, जो सामने वाले की बात सुने बिना, उसके खानदान का भूगोल बदलने की क्षमता रखता हो।
भाषा की नई ‘संसदीय’ मर्यादा और चुनावी रैलियां
अब संसद में भी ‘असंसदीय’ शब्दों की सूची छोटी पड़ने लगी है। हमारे राजनेताओं ने ऐसे-ऐसे इशारे, कूटशब्द और गाली-नुमा उपनाम ईजाद कर लिए हैं कि अच्छे-अच्छे भाषाविद भी अपना सिर पकड़ लें। सोशल मीडिया के इस स्वर्णिम युग में, जहां मर्यादा को ‘कमजोरी’ और बदतमीजी को ‘कड़कपन’ समझा जाता है, वहां अपशब्दों का यह पुनरागमन दरअसल एक ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ ही तो है। अब वह दिन दूर नहीं जब स्कूलों के पाठ्यक्रम में ‘चुनावी भाषाशास्त्र’ नाम का एक नया विषय जोड़ा जाएगा, ताकि नई पीढ़ी समय रहते देश सेवा के इस सबसे जरूरी हुनर को सीख सके।
‘काक-वाणी’ का स्पष्ट मानना है कि जल्द ही राजनीतिक दलों को अपने चुनावी घोषणापत्र में यह भी लिखना होगा कि वे सत्ता में आने के बाद विपक्ष को कितनी नई और रचनात्मक गालियां देने की क्षमता रखते हैं। इसके लिए शायद एक अलग से ‘अपशब्द और कीचड़-उछाल मंत्रालय’ भी बना दिया जाए, तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। राजनीति के इस नए ‘सभ्य’ रंग को देखकर हम तो बस यही कह सकते हैं—अति सुंदर, अद्भुत, अकल्पनीय!
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