Title: गुमनाम शहर की कहानी
एक छोटे शहर में एक कुछ अनोखा होता था। जब भी कोई इस शहर में जाता, उसे महसूस होता था कि यहाँ कुछ अलग होता है। लोग धीरे-धीरे इस शहर की कहानी सुनते गए और फिर यहीं सबसे ज्यादा मनोरंजन मिलता था।
शहर के बीच में एक बड़ा हाट था। वहाँ रोजमर्रा की जिंदगी बहुत जगहों से बिकरी होती थी। ऐसे ही एक दिन वहाँ एक सस्ती बिक्री शुरू हो गई। बहुत से लोगों के रुई कपड़े, घर के सामान, पुराने दोस्तों से मिले हुए खेल-खिलौने और अन्य चीजों की बिक्री होती थी। एक लड़की वहाँ आगंतुक थी। उसने दुनिया भर की यात्रा की हुई पुरानी किताबें हांथ में ली हुई थी। वह उनको बेच रही थी। बिहारी लाल अमृत की कविताओं से लेकर भगवद गीता तक के पुस्तकों का समूह मौजूद था।
शहर में एक अनोखी बात थी, जो कि इस लड़की की नहीं, बल्कि उस शहर की थी। वह थी इस शहर की लिपटी जिंदगी। दिन में शहर में होती इस गतिविधि को कोई नहीं देखता था और रात में वह देखी जाती थी। इस शहर में कुछ लोग होते थे, जो दिन में कुछ भी करते नहीं थे, लेकिन रात को वह लिपटी जिंदगी का हिस्सा बन जाते थे। ये थे शहर की चौकीदार, जो रात को सबका देखभाल करते थे, शॉप्स और घरों की चौखटों पर घूम कर मुलाकात करते थे। इन लोगों में से कुछ शराब भी पीते थे, जिससे वे शहर की रहगुज़ार होते थे।
लेकिन, लड़की ने अपनी किताबें सस्ते मूल्य में कॉलेज के छात्रों के बीच बेचने की तरफ ध्यान दिया। कोई उनकी बिक्री नहीं खरीद रहा था। आखिरकार, एक नए फैसला लेने के बाद, वह अपनी बिक्री की कार्यवाही रात को करने का फैसला लिया।
अगली रात, लड़की ने अपनी किताबों को बाहर निकाला, उन्हें हल्के से सुनहरे बन्दूक में रखा और बाजार के आसपास घूमने लगी। जब शहर की रहगुज़ार हो रही सीमाओं से बाहर निकली, तो उन्हें यह महसूस हुआ कि इस महान विशालकाय बाजार में से अकेला ही कुछ लोग निकले थे जो कि बेचारी उस लड़की के साथ असंतुष्ट थे। वह उन्हें जानती नहीं थी और नहीं जानना चाहती थी, लेकिन उन्हें पता चल रहा था कि उनकी मौजूदगी उन्हें असंतुष्ट कर रही थी।
तभी उनके सामने एक लड़का आ गया। वह उस लड़के को पहली नजर में थोड़ा सा डरा हुआ लगा। लेकिन बाद में उसने समझा कि यह आम बात है, जैसे कि वह सबके साथ-साथ रहता है। लड़का उसे पूछता है कि क्या वह अपना कोई सामान खरीद नहीं सकती। लेकिन उस लड़की की मनी को कुछ भी सही नहीं लग रहा था।
उस लड़के ने उसे जबड़े में पकड़ लिया और उन्हें एक शानदार भोजन का आमंत्रण दिया। लड़की इस स्थान के साथ बहुत अछूती थी, क्योंकि यह न तो ओनस, न ही यहाँ का कोई वहीन्द्र था और न ही यहाँ कोई लोग बैठे थे। लेकिन वह उस लड़के को ठीक से जानती थी। यह था वही जो इस शहर का सीमांत था और इस शहर की बाहर जो सभी लोग शर्माते थे। वह इस शहर में भीख मांगने आता था और उसे बहुत खुशी मिली थी कि सबसे कम से कम, यहाँ भी उसे कुछ समझदार लोग मिलते थे। उस लड़की ने इस समय चैनल-डी लगाने के लिए एक पर्याप्त अंतराल दिया था और स्पष्ट रूप से जता रही थी कि उसे इस बाजार से पोस्टर निकालकर बाहर निकल जाना चाहिए।
कुछ देर बातचीत के बाद, वह लड़का उस लड़की के बारे में जानने लगा। क्योंकि वह एक भिखारी नहीं था, लेकिन उसे उस लड़की की समझ से बौखला गया था। उसे यह नहीं पता था कि वह कौन हैं, लेकिन उसने उनके पास जाकर उस स्थान से अचानक रुक-रुक कर बातचीत की। उसके एहसास ने उसे ज़िन्दगी में कुछ और खोजना शुरू किया था।
इस दोस्ती से, उनकी मौजूदगी कमजोर होनी शुरू हो गई, लेकिन वे बड़े प्रेम ओर भरसक मेहमान ढूँढने जा रहे थे। उन्होंने अंततः उसे एक पंख चलाने के लिए दोस्तों के बीच जानने की बचाने उस महान शहर में साथी बनाया।