दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र और सबसे पुराने लोकतंत्र के बीच का ‘फेविकोल का जोड़’ एक बार फिर रूसी तेल की चिकनाई से फिसलने लगा है। अमेरिकी संसद (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में एक ऐसा प्रस्ताव पास हुआ है, जिसने भारतीय बाजार में हलचल मचा दी है। प्रस्ताव का सीधा संदेश है- “या तो हमारा महंगा तेल खरीदो, या फिर रूसी तेल पीकर 100% टैरिफ भुगतने के लिए तैयार रहो।” वाह रे चाचा सैम! इसे कहते हैं ‘फ्री ट्रेड’ की वो अनूठी परिभाषा, जो केवल वाशिंगटन की लैब में ही तैयार हो सकती है और पूरी दुनिया को जबरन चखनी पड़ती है।
लोकतंत्र का तेल और तानाशाही का टैरिफ
हमारे प्रिय अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन अक्सर वैश्विक मंचों पर भारत को अपना ‘परम मित्र’ बताते नहीं थकते। लेकिन जब बात व्यापार और मुनाफे की आती है, तो यह दोस्ती तुरंत ‘बिजनेस’ में बदल जाती है। भारत ने जब से अपनी जनता को महंगाई से बचाने के लिए रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदना शुरू किया है, तब से पश्चिमी देशों के पेट में ऐसा दर्द उठा है जिसकी कोई दवा नहीं बनी। अब अमेरिकी सांसदों को लगता है कि भारत को सबक सिखाने का समय आ गया है। 100% टैरिफ की धमकी देकर वे शायद यह जताना चाहते हैं कि दुनिया में दादागीरी आज भी उन्हीं की चलती है।
डबल स्टैंडर्ड की पाठशाला और ‘विश्वगुरु’ का इम्तिहान
दिलचस्प बात यह है कि जब यूरोप खुद अपनी जरूरत के लिए रूसी गैस और तेल चुपके से खरीद रहा होता है, तब वह ‘रणनीतिक आवश्यकता’ बन जाती है। लेकिन जब भारत अपनी विशाल और गरीब आबादी के लिए सस्ता ईंधन खरीदता है, तो यह ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ और ‘युद्ध की फंडिंग’ बन जाता है। अमेरिकी नीति निर्माताओं का यह दोहरा मापदंड वाकई कमाल का है। वे चाहते हैं कि हम महंगाई की आग में जल जाएं, लेकिन उनके हथियार उद्योग और तेल कंपनियों का धंधा मंदा न हो। इस बीच, हमारे ‘विश्वगुरु’ वाले गुब्बारे की हवा की भी परीक्षा होने वाली है।
अब देखना यह होगा कि हमारे विदेश मंत्रालय के शेर इस ‘100% टैरिफ’ की गीदड़भभकी का जवाब किस कड़क अंदाज में देते हैं। क्या हम रूस से तेल खरीदना बंद कर देंगे या फिर अमेरिका को यह समझाएंगे कि दोस्ती बराबरी की शर्तों पर होती है, डंडे के जोर पर नहीं। फिलहाल तो देश की जनता यही दुआ कर रही है कि वैश्विक महाशक्तियों के इस तेल-युद्ध में कम से कम उनके स्कूटर का पेट्रोल और सस्ता हो जाए, बाकी भू-राजनीति पर कांव-कांव करने के लिए ‘काक-वाणी’ तो हाजिर है ही!</p
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