गाँव के एक शांत कोने में सत्तर वर्षीय रामदीन की छोटी सी झोपड़ी थी। रामदीन मिट्टी के बर्तन और सुंदर दिए बनाने का काम करता था। उसकी ढलती उम्र के कारण अब उसके हाथ थोड़े काँपने लगे थे, लेकिन मिट्टी से उसका प्रेम वैसा ही था जैसा उसकी युवावस्था में था। उसका आठ साल का पोता, गोलू, दिन भर अपने दादाजी को चाक घुमाते और बेजान मिट्टी को आकार देते देखा करता था।
सपनों का बड़ा दीया
गाँव में दीवाली का त्योहार आने वाला था। रामदीन का सपना था कि वह इस बार मंदिर के लिए एक ऐसा विशाल दीया बनाए, जिसकी लौ पूरे गाँव को रोशन करे और जिसकी सुंदरता देखकर हर कोई हैरान रह जाए। उसने कई दिनों की कठिन मेहनत के बाद उस दीये को चाक पर गढ़ा। दीया बेहद सुंदर और उस पर की गई नक्काशी अद्भुत थी। गोलू भी अपने दादाजी के इस सपने को साकार होते देखकर बहुत खुश था।
लेकिन दीवाली से ठीक दो दिन पहले, जब रामदीन उस सूखे हुए दीये को भट्टी में पकाने के लिए ले जा रहा था, उसके काँपते हाथों से वह विशाल दीया छूटकर ज़मीन पर गिर गया। मिट्टी का वह खूबसूरत दीया पल भर में कई टुकड़ों में टूटकर बिखर गया।
टूटे दिल की नई उम्मीद
रामदीन ज़मीन पर बैठकर फूट-फूटकर रोने लगा। उसकी आँखों में सालों की मेहनत और अधूरे सपने बह रहे थे। उसने उदास होकर गोलू से कहा, “बेटा, मेरी उम्र अब पूरी हो चुकी है। मेरे काँपते हाथों ने मेरा सबसे बड़ा सपना तोड़ दिया। अब मुझमें दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत नहीं है।”
गोलू ने अपने नन्हे हाथों से दादाजी के आँसू पोंछे और मिट्टी के उन टुकड़ों को समेटते हुए मुस्कुराकर कहा, “दादाजी, आप ही तो कहते हैं कि जब तक मिट्टी गीली होती है, उसे फिर से नया आकार दिया जा सकता है। मिट्टी तो सिर्फ ज़मीन पर गिरी है, आपका हुनर नहीं टूटा। हम दोनों मिलकर इसे फिर से बनाएंगे।”
पोते की यह निश्छल और प्रेरणादायक बात सीधे रामदीन के दिल में उतर गई। उसे अहसास हुआ कि असली हार बर्तन के टूटने में नहीं, बल्कि हिम्मत हारकर बैठ जाने में है।
सफलता का नया सवेरा
रामदीन ने तुरंत अपनी थकावट और निराशा को भुलाकर दोबारा मिट्टी गूँथना शुरू किया। इस बार गोलू ने भी मिट्टी गूँथने और चाक घुमाने में अपने दादाजी का हाथ बटाया। दोनों ने मिलकर पूरी रात मेहनत की और एक नया, पहले से भी अधिक मजबूत और सुंदर दीया तैयार किया।
दीवाली की शाम, जब वह विशाल दीया मंदिर के प्रांगण में प्रज्वलित हुआ, तो उसकी सुनहरी रोशनी में पूरा गाँव जगमगा उठा। उस दीये की लौ में रामदीन का स्वाभिमान और गोलू का अटूट विश्वास साफ़ दिखाई दे रहा था।
सीख: जीवन में असफलता और विपरीत परिस्थितियाँ हमें तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि हमारी छिपी हुई क्षमता को निखारने के लिए आती हैं। जब तक हमारे भीतर प्रयास करने का हौसला है, तब तक कोई भी असफलता अंतिम नहीं हो सकती।