अहा! ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ के एक महान पत्रकार महोदय भारत पधारे। उन्होंने यहाँ की सड़कों पर चाय पी, एकाध ऑटो वाले से बात की और तुरंत इस ऐतिहासिक नतीजे पर पहुँच गए कि भारत में जो कुछ हो रहा है, उससे डोनाल्ड ट्रम्प को डरना चाहिए। वाह! अमेरिकी पत्रकारों की यह दिव्य दृष्टि देखकर ‘काक-वाणी’ का कौआ भी सम्मान में अपनी कांव-कांव भूल गया है। आखिरकार, बेचारों की मजबूरी है—पूरी दुनिया का ब्रह्मांड तो अमेरिका और उनके ‘ट्रम्प बाबा’ के इर्द-गिर्द ही घूमता है ना!
अमेरिकी ज्ञान का ‘देसी’ तड़का
इन पश्चिमी ज्ञानियों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इन्हें दुनिया के हर कोने में या तो ट्रम्प दिखते हैं या ट्रम्प का भूत। अब भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले, रंग-बिरंगे और धाकड़ लोकतंत्र की तुलना ये ट्रम्प के राजनीतिक ड्रामे से कर रहे हैं। अरे भाई! ट्रम्प साहब तो अभी भारतीय राजनीति के केजी (KG) क्लास में हैं। हमारे यहाँ के राजनेता सुबह-सुबह जितने दांव-पेच चाय की चुस्की और जलेबी के साथ खेल जाते हैं, उतने में ट्रम्प जी के दसों वकील सर पकड़कर इस्तीफा दे दें।
ट्रम्प जी, भारत आओगे तो डिप्रेशन में चले जाओगे!
न्यूयॉर्क टाइम्स का कहना है कि भारत की राजनीति ट्रम्प के लिए एक डरावनी चेतावनी है। सच तो यह है कि अगर ट्रम्प को भारत के किसी एक राज्य के विधानसभा चुनाव में उतार दिया जाए, तो वे तीन दिन में भाषण देना भूलकर फ्लोरिडा के अपने गोल्फ कोर्स भाग जाएँगे। ट्रम्प बाबू केवल सोशल मीडिया पर रोते हैं कि उनके खिलाफ ‘साजिश’ हो रही है। यहाँ हमारे यहाँ नेता हारने के बाद ईवीएम (EVM) से लेकर मौसम विभाग और ग्रहों की दशा तक पर धांधली का आरोप लगाकर अगला चुनाव जीतने की तैयारी शुरू कर देते हैं।
हमारे यहाँ राजनीति सिर्फ भाषणबाज़ी नहीं है, यह एक ‘महाकुंभ’ है—जहाँ मुफ्त की रेवड़ियां, जातिगत समीकरण, ईडी-सीबीआई के छापे और ‘चाचा हमारे विधायक हैं’ का भौकाल चलता है। ट्रम्प साहब, आपने तो बस कैपिटल हिल पर अपने मुट्ठी भर समर्थकों को भेजा था, हमारे यहाँ गाँव की प्रधानी के चुनाव में भी उससे ज्यादा गाड़ियां और पुलिस का काफिला घूमता है!
काक-वाणी का सीधा संदेश
‘काक-वाणी’ न्यूयॉर्क टाइम्स के उस ज्ञानी लेखक को सलाह देती है कि अगली बार भारत आएँ तो थोड़ा ‘मसाला डोसा’ खाकर दिमाग ठंडा रखें। दुनिया की हर घटना को अपने अमेरिकी चश्मे से देखना बंद करें। ट्रम्प को भारत से डरने की जरूरत नहीं है, ट्रम्प को तो बस अपने बयानों और अपने बालों को सँभालने की जरूरत है। भारत का लोकतंत्र अपनी रफ्तार से चलता रहेगा, चाहे न्यूयॉर्क टाइम्स वाले कितना भी छाती पीट लें!
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