बॉलीवुड में जब भी किसी संजीदा और बेबाक फिल्ममेकर की बात होती है, तो तिग्मांशु धूलिया का नाम सबसे पहले जेहन में आता है। ‘हासिल’ और ‘पान सिंह तोमर’ जैसी कल्ट फिल्में देने वाले तिग्मांशु हमेशा अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में ईटीवी भारत को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कुछ ऐसा कह दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई और सकारात्मक बहस छेड़ दी है। तिग्मांशु का मानना है कि हिंदी सिनेमा ने अपनी भाषा के दम पर पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का ऐतिहासिक काम किया है।
तिग्मांशु धूलिया का ‘फिल्मी फॉर्मूला’: भाषा ने मिटाई भौगोलिक दूरियां
अक्सर देश में उत्तर और दक्षिण के बीच भाषा को लेकर तीखी बहस देखने को मिलती है। लेकिन तिग्मांशु धूलिया का नजरिया बेहद अलग और व्यावहारिक है। उन्होंने कहा कि हिंदी सिनेमा ने देश को सांस्कृतिक रूप से जोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। भले ही कोई व्यक्ति तमिल, तेलुगु या बंगाली भाषी हो, लेकिन बॉलीवुड फिल्मों और गानों के जरिए हिंदी आज देश के कोने-कोने में पहुंच चुकी है। लोग भले ही हिंदी लिखना या शुद्ध बोलना न जानते हों, लेकिन फिल्मों के कारण वे इसे बखूबी समझते हैं। और इसका पूरा श्रेय हमारे सिनेमाई सफर को जाता है।
गानों और डायलॉग्स ने किया असली कमाल
धूलिया ने अपनी बात को पुख्ता करते हुए समझाया कि जब कोई गैर-हिंदी भाषी व्यक्ति किशोर कुमार का गाना गुनगुनाता है या अमिताभ बच्चन का ‘डॉन’ वाला डायलॉग बोलता है, तो वहां भाषा की सारी दीवारें खुद-ब-खुद ढह जाती हैं। हिंदी सिनेमा ने एक ऐसी ‘आम बोलचाल की हिंदी’ तैयार की है जो किताबी नहीं, बल्कि सीधे दिलों को जोड़ने वाली है। यह कोई सरकारी या राजनीतिक दबाव नहीं, बल्कि मनोरंजन का वो जादू है जिसने कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक सबको एक रंग में रंग दिया है।
काक-वाणी का नजरिया: क्या वाकई सिनेमा ही है असली फेविकोल?
अब आते हैं ‘काक-वाणी’ के अपने खास तीखे और मीठे विश्लेषण पर। तिग्मांशु भाई की बात में सौ फीसदी दम है। जहां सरकारें सालों-साल और करोड़ों रुपये खर्च करके जो सांस्कृतिक एकता स्थापित नहीं कर पातीं, वो काम तीन घंटे की एक बॉलीवुड मसाला फिल्म और उसमें अरिजीत सिंह के दर्द भरे गानों ने हंसते-खेलते कर दिखाया है। आज साउथ के थिएटर्स में भी हिंदी गानों पर तालियां बजती हैं। कुल मिलाकर, सिनेमा सिर्फ बॉक्स ऑफिस का खेल नहीं है, बल्कि यह देश को जोड़ने वाला वो अदृश्य फेविकोल है, जो विविधताओं से भरे भारत को एक बनाए रखता है।
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